×

श्री गणेश अष्टकम: बुधवार और गणेश चतुर्थी पर जरूर करें पाठ, जानें धार्मिक महत्व और लाभ

 

भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देव माना जाता है। हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करने की परंपरा है। गणेश जी की आराधना के लिए गणेशाष्टकम् का पाठ भी विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा और एकाग्रता के साथ गणेशाष्टकम् का पाठ करने से भक्त को आध्यात्मिक शांति मिलती है और कार्यों में आने वाली बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना की जाती है।

श्री गणेशाष्टकम् के बोल

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/R27yqyWoHBs?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/R27yqyWoHBs/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

एकदन्तं महाकायं तप्तकाञ्चनसन्निभम्।
लम्बोदरं विशालाक्षं वन्देऽहं गणनायकम्॥

विघ्नराजं महाभागं भक्तानामभयप्रदम्।
प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम्॥

गणेशाष्टकम् का धार्मिक महत्व

गणेशाष्टकम् में भगवान गणेश के विभिन्न स्वरूपों और गुणों का स्मरण किया जाता है। इसमें गणपति को विघ्नों को दूर करने वाले, भक्तों को अभय प्रदान करने वाले और गौरीपुत्र के रूप में नमन किया जाता है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश जी की पूजा करने से पहले उनका ध्यान और स्तुति करने से मन एकाग्र होता है। भक्त अपनी मनोकामना और शुभ कार्य की सफलता के लिए भगवान गणेश से प्रार्थना करते हैं।

कब करें गणेशाष्टकम् का पाठ?

गणेशाष्टकम् का पाठ सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ स्थान पर बैठकर किया जा सकता है। बुधवार और गणेश चतुर्थी के दिन इसका पाठ विशेष रूप से किया जाता है। किसी नए काम, व्यापार, गृह प्रवेश या अन्य शुभ कार्य से पहले भी भगवान गणेश का स्मरण करने की परंपरा है।पाठ के दौरान भगवान गणेश को दूर्वा, लाल फूल और मोदक अर्पित किए जा सकते हैं। इसके बाद श्रद्धा के साथ गणेश मंत्र का जाप किया जाता है।

गणेश जी की आराधना का संदेश

भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और शुभता का प्रतीक माना जाता है। गणेशाष्टकम् का पाठ भक्त को भगवान के प्रति श्रद्धा और समर्पण का भाव रखने की प्रेरणा देता है। धार्मिक मान्यताओं से जुड़े लाभों को आस्था के रूप में ही समझना चाहिए।