श्री गणेश अष्टकम हिन्दी अर्थ सहित: गणपति बप्पा की महिमा का वर्णन करता है यह पवित्र स्तोत्र
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी की पूजा और स्मरण करने की परंपरा है। श्री गणेशाष्टकम् भगवान गणपति की स्तुति को समर्पित एक पवित्र स्तोत्र है। मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ इसका पाठ करने से विघ्नों से मुक्ति और शुभता की प्राप्ति होती है।
श्री गणेशाष्टकम्
गणाधीशं गुणश्रेष्ठं गुणानां च परायणम्।
योगिनां ध्यानगम्यं च तं वन्दे गजवक्त्रकम्॥
एकदन्तं महाकायं लम्बोदरं गजाननम्।
विघ्ननाशकरं देवं हेरम्बं प्रणमाम्यहम्॥
वक्रतुण्डं महावीर्यं सूर्यकोटिसमप्रभम्।
निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभकार्येषु सर्वदा॥
कृपाकरं दयासिन्धुं भक्तवत्सलमव्ययम्।
भक्तानां वरदं नित्यं वन्देऽहं गणनायकम्॥
गणेशाष्टक पाठ का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश जी का नाम लेने और उनकी स्तुति करने से जीवन में आने वाले विघ्न दूर होते हैं। बुधवार, गणेश चतुर्थी और किसी शुभ कार्य की शुरुआत के समय गणेशाष्टक का पाठ विशेष रूप से किया जाता है।
सुबह स्नान करने के बाद भगवान गणेश के सामने दीपक जलाकर दूर्वा और मोदक अर्पित करें। इसके बाद शांत मन से गणेशाष्टक का पाठ करें। अंत में “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप किया जा सकता है।