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पितरों की तस्वीर मंदिर में रखनी चाहिए या नहीं? जानें फोटो लगाने की सही दिशा

 

हिंदू धर्म में पितरों यानी दिवंगत पूर्वजों को सम्मान देने की परंपरा रही है। घर में कई लोग अपने माता-पिता, दादा-दादी या अन्य पूर्वजों की तस्वीर लगाते हैं। अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि क्या पितरों की तस्वीर भगवान के मंदिर में रखी जा सकती है? साथ ही फोटो लगाने के लिए कौन सी दिशा शुभ मानी जाती है?

वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितरों की तस्वीर को घर में सम्मानजनक स्थान पर रखना चाहिए, लेकिन उसे देवी-देवताओं की तस्वीरों के साथ मंदिर में रखने की सलाह आम तौर पर नहीं दी जाती। पितरों की तस्वीर के लिए अलग स्थान रखना अधिक उचित माना जाता है।

क्या पितरों की तस्वीर मंदिर में रखनी चाहिए?

वास्तु मान्यताओं के अनुसार घर के मंदिर में मुख्य रूप से देवी-देवताओं की तस्वीर या मूर्ति रखी जाती है। पितरों की तस्वीर को उसी पूजा स्थल में रखने से बचने की सलाह दी जाती है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि पितरों की तस्वीर रखना अशुभ है। पूर्वजों का सम्मान करना भारतीय परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बस उनके लिए घर में अलग और साफ-सुथरा स्थान निर्धारित करना बेहतर माना जाता है।

पितरों की तस्वीर लगाने के लिए कौन सी दिशा सही?

वास्तु शास्त्र की मान्यताओं में दक्षिण दिशा को पितरों से संबंधित दिशा माना जाता है। इसलिए पितरों की तस्वीर दक्षिण दिशा की दीवार पर लगाने की परंपरा बताई जाती है।

तस्वीर ऐसी जगह लगानी चाहिए जहां परिवार के सदस्य श्रद्धापूर्वक उनका स्मरण कर सकें। फोटो को बहुत ऊंचाई पर या ऐसी जगह लगाने से बचना चाहिए जहां उसे आसानी से देखा या साफ न किया जा सके।

एक साथ कई तस्वीरें कैसे लगाएं?

अगर परिवार में कई पूर्वजों की तस्वीरें हैं तो उन्हें व्यवस्थित तरीके से एक स्थान पर लगाया जा सकता है। तस्वीरों को बेतरतीब तरीके से अलग-अलग कमरों में लगाने के बजाय एक सम्मानजनक स्थान निर्धारित करना बेहतर माना जाता है।

तस्वीरों के आसपास साफ-सफाई रखें और उन्हें धूल-मिट्टी से बचाएं।

किन जगहों पर पितरों की तस्वीर नहीं लगानी चाहिए?

वास्तु मान्यताओं के अनुसार पितरों की तस्वीर को रसोई, बाथरूम या बहुत अव्यवस्थित स्थान पर लगाने से बचना चाहिए। इसी तरह बेडरूम में भी तस्वीर लगाने से बचने की सलाह दी जाती है।

पितरों की तस्वीर को घर के प्रवेश द्वार के ठीक सामने लगाने से भी बचना बेहतर माना जाता है। तस्वीर के लिए ऐसा स्थान चुनें जहां शांति और सम्मान का वातावरण हो।

क्या पितरों की तस्वीर के सामने दीपक जला सकते हैं?

पितरों का स्मरण करते समय दीपक जलाने और श्रद्धा से प्रार्थना करने की परंपरा कई परिवारों में है। श्राद्ध पक्ष और पितृ तर्पण के अवसर पर भी पूर्वजों को श्रद्धांजलि दी जाती है।

हालांकि पितरों की तस्वीर को नियमित देवी-देवता की पूजा के समान पूजा-पद्धति का हिस्सा बनाना आवश्यक नहीं माना जाता। परिवार की परंपरा और धार्मिक रीति के अनुसार पितरों का स्मरण किया जा सकता है।

सबसे जरूरी है सम्मान और श्रद्धा

पितरों की तस्वीर रखने को लेकर अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में अलग मान्यताएं हो सकती हैं। इसलिए इसे डर या अंधविश्वास की तरह लेने के बजाय पूर्वजों के प्रति सम्मान और स्मरण की परंपरा के रूप में देखना बेहतर है।

अगर घर में पितरों की तस्वीर है तो उसे साफ-सुथरी और सम्मानजनक जगह पर रखें। वास्तु मान्यता के अनुसार दक्षिण दिशा को इसके लिए उपयुक्त माना जाता है और देवी-देवताओं के मंदिर से अलग स्थान रखना बेहतर माना जाता है।