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Sawan Somwar 2026: सावन का आखिरी सोमवार आज, बन रहे कई शुभ योग, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

 

सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। आज यानी 24 अगस्त 2026 को सावन का आखिरी सोमवार है। उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार इस साल सावन की शुरुआत 30 जुलाई से हुई थी और सावन के चार सोमवार 3, 10, 17 और 24 अगस्त को पड़े। सावन पूर्णिमा के साथ 28 अगस्त को श्रावण मास समाप्त होगा। सावन के अंतिम सोमवार को शिव भक्त व्रत रखते हैं और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। इस बार अंतिम सावन सोमवार को कई शुभ योग बनने की बात कही जा रही है, जिससे धार्मिक दृष्टि से इस दिन का महत्व और बढ़ गया है।

सावन के आखिरी सोमवार पर बन रहे शुभ योग

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पंचांग के अनुसार 24 अगस्त को प्रीति योग, आयुष्मान योग, हंस राजयोग और बुधादित्य योग जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं। इसके अलावा कुछ पंचांगों में सर्वार्थ सिद्धि, सौभाग्य और रवि योग का भी उल्लेख किया गया है। अलग-अलग पंचांग पद्धतियों और स्थान के अनुसार योगों के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।धार्मिक मान्यता के अनुसार शुभ योग में भगवान शिव की पूजा, अभिषेक और मंत्र जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है। हालांकि इनसे जुड़े फल धार्मिक आस्था और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।

जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त

24 अगस्त को शिव पूजा के लिए अमृत चौघड़िया सुबह 5:55 बजे से 7:32 बजे तक और शुभ चौघड़िया सुबह 9:09 बजे से 10:46 बजे तक बताया गया है। वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:57 बजे से 12:48 बजे तक रहेगा। लाभ चौघड़िया दोपहर 3:38 बजे से 5:15 बजे तक बताया गया है।एक अन्य पंचांग के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:27 से 5:11 बजे तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2:30 से 3:21 बजे तक रहेगा। स्थान के अनुसार मुहूर्त में अंतर संभव है, इसलिए स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता देना उचित है।

ऐसे करें भगवान शिव की पूजा

सावन के अंतिम सोमवार को सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग पर साफ जल या गंगाजल अर्पित करें। अपनी परंपरा के अनुसार दूध से अभिषेक करने के बाद दोबारा जल चढ़ाया जा सकता है।इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल और चंदन अर्पित करें। दीपक जलाकर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार शिव चालीसा, रुद्राष्टक या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ भी कर सकते हैं। अंत में भगवान शिव की आरती करें और प्रसाद अर्पित करें।

राहुकाल में पूजा को लेकर रखें ध्यान

24 अगस्त को राहुकाल का समय लगभग सुबह 7:31 बजे से 9:08 बजे तक बताया गया है। धार्मिक पंचांग परंपरा में इस अवधि में नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि मंदिर में भगवान शिव की नियमित पूजा और दर्शन को लेकर स्थानीय परंपरा और मंदिर के नियमों का पालन करना चाहिए।सावन का आखिरी सोमवार शिव भक्तों के लिए इस पवित्र महीने की अंतिम विशेष पूजा का अवसर है। श्रद्धालु अपनी आस्था और सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखकर जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण और मंत्र जाप कर सकते हैं। हर हर महादेव।