Sawan 2026: सावन में लगेगा सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण? जानें तारीख, पूजा-पाठ पर क्या पड़ेगा असर
हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इस पवित्र महीने में भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं, व्रत रखते हैं और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। वहीं, इस साल सावन के दौरान ग्रहण की घटना को लेकर भी चर्चा हो रही है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है और इस दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करने की परंपरा है।
सावन महीने में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण पड़ने की बात कही जा रही है। ऐसे में श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि ग्रहण के समय पूजा-पाठ किया जा सकता है या नहीं और इसका धार्मिक महत्व क्या होगा।
सावन में कब लगेगा सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण?
पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, वर्ष 2026 में ग्रहण की घटनाएं होंगी। हालांकि, हर ग्रहण का भारत में दिखाई देना जरूरी नहीं होता। धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण का महत्व उसके दृश्य होने और स्थान के आधार पर भी देखा जाता है।
सावन के दौरान पड़ने वाले ग्रहण को लेकर श्रद्धालु इसकी तिथि, समय और प्रभाव को लेकर जानकारी लेना चाहते हैं। ग्रहण से जुड़ी सही जानकारी के लिए स्थानीय पंचांग और ज्योतिष विशेषज्ञों की सलाह ली जाती है।
ग्रहण के समय पूजा-पाठ को लेकर मान्यता
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के समय पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों को लेकर अलग-अलग परंपराएं प्रचलित हैं। कई मान्यताओं में ग्रहण काल के दौरान मंदिर के कपाट बंद रखने और पूजा सामग्री को ढककर रखने की परंपरा बताई गई है।
वहीं, कुछ लोग ग्रहण के दौरान मंत्र जाप और ध्यान को शुभ मानते हैं। विशेष रूप से भगवान के नाम का स्मरण करने की परंपरा कई जगहों पर देखी जाती है।
क्या सावन में शिव पूजा पर पड़ेगा असर?
सावन भगवान शिव को समर्पित महीना माना जाता है, इसलिए ग्रहण को लेकर भक्तों में विशेष जिज्ञासा रहती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि ग्रहण का समय पूजा के समय से अलग है तो सामान्य रूप से पूजा-अर्चना की जा सकती है।
ग्रहण काल में पूजा के नियमों को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं, इसलिए लोग अपनी परंपरा और आस्था के अनुसार निर्णय लेते हैं।
ग्रहण के दौरान किन बातों का रखते हैं ध्यान?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल में कई लोग इन बातों का पालन करते हैं:
- भगवान के मंत्रों का जाप करना।
- भोजन और पानी को ढककर रखना।
- धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना।
- ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और दान करना।
वैज्ञानिक दृष्टि से ग्रहण एक खगोलीय घटना है
ग्रहण को विज्ञान में एक खगोलीय घटना माना जाता है, जो सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की विशेष स्थिति के कारण होती है। सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, जबकि चंद्र ग्रहण पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ने से होता है।