Sankashti Chaturthi 2026: कल रखा जाएगा सावन का संकष्टी चतुर्थी व्रत, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय का समय
सावन माह की संकष्टी चतुर्थी का व्रत 2 अगस्त 2026, रविवार को रखा जाएगा। भगवान गणेश को समर्पित यह व्रत विशेष रूप से विघ्न-बाधाओं को दूर करने और सुख-समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है। सावन मास में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी का महत्व और भी बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करने और चंद्रमा को अर्घ्य देने से जीवन के संकट दूर होते हैं तथा परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। आइए जानते हैं पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें।
संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व
संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश की आराधना के लिए रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणपति बप्पा विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देव हैं। उनकी उपासना से कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। सावन माह में इस व्रत का पालन करने से भगवान शिव और श्रीगणेश दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है।
पूजा विधि
- प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
- पूजा स्थान को साफ कर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- भगवान गणेश को दूर्वा, लाल या पीले फूल, सिंदूर, अक्षत, मोदक, लड्डू और फल अर्पित करें।
- 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करें तथा गणेश चालीसा या संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करें।
- दिनभर श्रद्धानुसार व्रत रखें।
- रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद उन्हें अर्घ्य दें और फिर भगवान गणेश की पूजा के बाद व्रत का पारण करें।
शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय
संकष्टी चतुर्थी पर पूजा के लिए प्रदोष काल को शुभ माना जाता है। वहीं, व्रत का पारण चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने के बाद किया जाता है।
ध्यान दें: चंद्रोदय का सटीक समय आपके शहर और स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग या मान्य पंचांग के अनुसार चंद्रोदय का समय अवश्य देख लें।
व्रत के दौरान रखें इन बातों का ध्यान
- पूरे दिन सात्विक आहार और संयम का पालन करें।
- क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
- भगवान गणेश को दूर्वा और मोदक अवश्य अर्पित करें।
- चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना व्रत का पारण न करें।
संकष्टी चतुर्थी पर करें ये उपाय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश को 21 दूर्वा, 21 लड्डू या मोदक अर्पित करना शुभ माना जाता है। साथ ही 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का 108 बार जाप करने से विघ्न-बाधाएं दूर होने और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है।