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महामृत्युंजय मंत्र जाप के नियम: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कब और क्यों किया जाता है जाप?

 

धार्मिक परंपराओं में महामृत्युंजय मंत्र को भगवान शिव का अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली मंत्र माना गया है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक इसका जाप करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में आने वाले संकटों से रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पुरश्चरण और जाप की मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महामृत्युंजय मंत्र का पुरश्चरण सवा लाख (1,25,000) मंत्र जाप माना जाता है। वहीं, लघु मृत्युंजय मंत्र के लिए 11 लाख जाप का विधान बताया गया है। मंत्र सिद्धि के लिए इन संख्याओं का विशेष महत्व माना जाता है।

जाप कब और कैसे करें?

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मान्यता है कि महामृत्युंजय मंत्र का जाप सोमवार से प्रारंभ करना शुभ माना जाता है। अधिकांश परंपराओं में इसे रुद्राक्ष की माला से जपने की सलाह दी जाती है। कई धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंत्र जाप दोपहर 12 बजे से पहले पूरा कर लेना चाहिए। हालांकि, यह मान्यता विभिन्न परंपराओं में अलग-अलग हो सकती है और सभी संप्रदायों में एक समान स्वीकार नहीं की जाती।

यदि पुरश्चरण पूर्ण किया जाए, तो अंत में हवन करना शुभ और फलदायी माना जाता है।

किन परिस्थितियों में किया जाता है महामृत्युंजय मंत्र का जाप?

धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, निम्न परिस्थितियों में महामृत्युंजय या लघु मृत्युंजय मंत्र का जाप या अनुष्ठान कराया जाता है—

  • ग्रहबाधा और ग्रह पीड़ा की शांति के लिए।
  • रोगों से मुक्ति और उत्तम स्वास्थ्य की कामना के लिए।
  • जमीन-जायदाद से जुड़े विवादों के समाधान की प्रार्थना के लिए।
  • धन हानि या आर्थिक संकट से बचाव की कामना के लिए।
  • वर-वधू के कुंडली मिलान में दोषों की शांति के लिए।
  • परिवार में कलह और अशांति दूर करने की प्रार्थना के लिए।
  • न्यायिक मामलों या दंड के भय से मुक्ति की कामना के लिए।
  • धार्मिक भूलों के प्रायश्चित और पापों के क्षय की भावना से।

ध्यान रहे कि उपरोक्त सभी लाभ और मान्यताएं धार्मिक एवं ज्योतिषीय विश्वासों पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाता। किसी भी स्वास्थ्य, कानूनी या आर्थिक समस्या के समाधान के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है।