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बुधवार को करें इस स्तोत्र का पाठ, शिक्षा और व्यापार में मिलेगी सफलता

 

ज्योतिष न्यूज़ डेस्क: धर्म शास्त्रों के अनुसार बुधवार का दिन श्री गणेश और बुध ग्रह को समप्रित होता हैं ज्योतिष में हर दिन किसी न किसी ग्रह को समर्पित हैं बुधवार के दिन देवताओं के राजकुमार बुध ग्रह का पूजन किया जाता हैं बुध को वाणी, संचार और बुद्धि की कुशलता का ग्रह माना गया हैं इस दिन बुध ग्रह के उपाय करके कुंडली में स्थापित बुध दोष को दूर कर सकते हैं

बुधवार के दिन हरे रंग के वस्त्र धारण करने से बुध ग्रह के प्रभाव से वाणी और संचार कुशलता में वृद्धि होगी। जो कि कारोबार और शिक्षा के क्षेत्र में सफलता दिलाता हैं। जिन लोगों की कुंडली में बुध दोष व्याप्त हो, उन्हें इस दिन बुध स्तोत्र का पाठ जरूर करना चाहिए। 

वही बुध ग्रह के इस स्तोत्र का नियमित रूप से हर बुधवार को पाठ करना चाहिए ऐसा करने से बुध ग्रह प्रभावी होगा। बुधवार के दिन बुध स्तोत्र का पाठ करने से बुध दोष से मुक्ति मिलती हैं साथ ही बुध ग्रह प्रभावशाली होने से संचार और बुद्धि की कुशलता से व्यापार और शिक्षा के क्षेत्र में सफलता हासिल होती हैं तो आज हम आपके लिए लेकर आए हैं बुध स्तोत्र का संपूर्ण पाठ, तो आइए जानते हैं। 

बुध स्तोत्र पाठ—
 
पीताम्बर: पीतवपुः किरीटश्र्वतुर्भजो देवदु: खपहर्ता। धर्मस्य धृक् सोमसुत: सदा मे सिंहाधिरुढो वरदो बुधश्र्व ।।1।।

प्रियंगुकनकश्यामं रुपेणाप्रतिमं बुधम्। सौम्यं सौम्य गुणोपेतं नमामि शशिनंदनम ।।2।।

सोमसूनुर्बुधश्चैव सौम्य: सौम्यगुणान्वित:। सदा शान्त: सदा क्षेमो नमामि शशिनन्दनम् ।।3।।

उत्पातरूप: जगतां चन्द्रपुत्रो महाधुति:। सूर्यप्रियकारी विद्वान् पीडां हरतु मे बुध: ।।4।।

शिरीष पुष्पसडंकाश: कपिशीलो युवा पुन:। सोमपुत्रो बुधश्र्वैव सदा शान्ति प्रयच्छतु ।।5।।

श्याम: शिरालश्र्व कलाविधिज्ञ: कौतूहली कोमलवाग्विलासी । रजोधिकोमध्यमरूपधृक्स्यादाताम्रनेत्रीद्विजराजपुत्र: ।।6।।

अहो चन्द्र्सुत श्रीमन् मागधर्मासमुद्रव:। अत्रिगोत्रश्र्वतुर्बाहु: खड्गखेटक धारक: ।।7।।

गदाधरो न्रसिंहस्थ: स्वर्णनाभसमन्वित:। केतकीद्रुमपत्राभ इंद्रविष्णुपूजित: ।।8।।

ज्ञेयो बुध: पण्डितश्र्व रोहिणेयश्र्व सोमज:। कुमारो राजपुत्रश्र्व शैशेव: शशिनन्दन: ।।9।।

गुरुपुत्रश्र्व तारेयो विबुधो बोधनस्तथा। सौम्य: सौम्यगुणोपेतो रत्नदानफलप्रद: ।।10।।

एतानि बुध नमामि प्रात: काले पठेन्नर:। बुद्धिर्विव्रद्वितांयाति बुधपीड़ा न जायते ।।11।।