चैत्र नवरात्रि में रोजाना करें दुर्गा स्तोत्र का पाठ, सभी दुखों से मिलेगा छुटकारा
चैत्र नवरात्रि को मां दुर्गा की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इन नौ दिनों में भक्त मां भगवती के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान श्रद्धा और भक्ति से दुर्गा स्तोत्र का पाठ करने से मन को शांति मिलती है और मां भगवती की कृपा प्राप्त होती है।
जय भगवती देवी नमो वरदे।
जय पाप विनाशिनी बहुफलदे।
जय शुम्भ निशुम्भ कपाल धरे।
प्रणमामि तु देवि नरार्तिहरे॥
जय चन्द्र दिवाकर नेत्र धरे।
जय पावक भूषित वक्त्र वरे।
जय भैरव देह निलीन परे।
जय अन्धक दैत्य विशोषकरे॥
जय महिष विमर्दिनी शूलकरे।
जय लोक समस्तकपापहरे।
जयदेवि पितामह विष्णुनते।
जय भास्कर शक्रशिरोवनते॥
जय षण्मुख सायुध ईशनुते।
जय सागर गामिनि शम्भुनुते।
जय दुःख दरिद्र विनाशकरे।
जय पुत्रकलत्र विवृद्धिकरे॥
जय देवि समस्त शरीरधरे।
जय नाकविदर्शिनी दुःख हरे।
जय व्याधि विनाशिनी मोक्षकरे।
जय वांछित दायिनी सिद्धिवरे॥
एतद्व्यासकृतं स्तोत्रं यः पठेन्नियतः शुचिः।
गृहे वा शुद्धभावेन प्रीता भगवती सदा॥
कैसे करें दुर्गा स्तोत्र का पाठ?
नवरात्रि में सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। मां दुर्गा के सामने दीपक जलाकर लाल फूल और चुनरी अर्पित करें। इसके बाद शांत मन से दुर्गा स्तोत्र का पाठ करें। पाठ के दौरान मां के स्वरूप का ध्यान करें और अंत में अपनी मनोकामना मां के सामने रखें।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, नियमित पाठ से नकारात्मक विचारों से मुक्ति, मानसिक शांति और आत्मविश्वास प्राप्त करने में सहायता मिलती है। हालांकि, दुख या बीमारी जैसी वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए व्यावहारिक प्रयास और आवश्यक होने पर चिकित्सकीय या विशेषज्ञ सहायता भी जरूरी है।