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महाशिवरात्रि पर पढ़ें श्री शिव चालीसा, शिव आरती और महामृत्युंजय मंत्र, भोलेनाथ की मिलेगी कृपा

 

महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन शिव भक्त व्रत रखते हैं, शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और पूरी श्रद्धा के साथ भगवान भोलेनाथ की आराधना करते हैं। शिव चालीसा का पाठ भगवान शिव की भक्ति का एक लोकप्रिय माध्यम माना जाता है। महाशिवरात्रि, सावन सोमवार और प्रदोष व्रत जैसे अवसरों पर शिव चालीसा का पाठ करने की विशेष धार्मिक मान्यता है।

शिव चालीसा का महत्व

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शिव चालीसा में भगवान शिव के स्वरूप, गुणों और महिमा का वर्णन किया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा और भक्ति के साथ शिव चालीसा का पाठ करने से मन को शांति मिलती है और भक्त भगवान शिव का स्मरण कर सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करता है।

महाशिवरात्रि के दिन शिव मंदिर में पूजा करने के बाद शिव चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है। घर पर भी भगवान शिव की तस्वीर या शिवलिंग के सामने दीपक जलाकर इसका पाठ किया जा सकता है।

सुपरफास्ट शिव चालीसा पाठ

॥ दोहा ॥

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

॥ चौपाई ॥

जय गिरिजानंदन हर महेशा।
सुर नर मुनि जन सेवत तेशा॥

भाल चंद्रमा सोहत नीके।
कानन कुंडल नागफनी के॥

अंग गौर शिर गंग बहाए।
मुंडमाल तन छार लगाए॥

वस्त्र खाल बाघंबर सोहे।
छवि को देख नाग मुनि मोहे॥

मैना मातु की ह्वै दुलारी।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥

नंदी गणेश सोहैं तहं कैसे।
सागर मध्य कमल हैं जैसे॥

कार्तिक श्याम और गणराऊ।
या छवि को कहि जात न काऊ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई।
तब सबहिं कृपा करि बचाई॥

कीन्हा तप भागीरथ भारी।
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥

दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं।
सेवक स्तुति करत सदाहीं॥

वेद नाम महिमा तव गाई।
अघट अवघट सब पाप नसाई॥

शिव भजन और मंत्र जाप

शिव चालीसा के बाद भक्त ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप कर सकते हैं। महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का जलाभिषेक करते समय पंचाक्षरी मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है।

इसके अलावा भगवान शिव के भजनों और स्तुति का श्रवण करने से भक्तिमय वातावरण बनता है। महादेव की आरती और महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी श्रद्धालु अपनी पूजा में शामिल कर सकते हैं।

महाशिवरात्रि पर ऐसे करें शिव पूजा

सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें। भगवान शिव का ध्यान कर पूजा का संकल्प लें। शिवलिंग पर जल या गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद बेलपत्र, फूल और फल चढ़ाएं। भगवान शिव की आरती करें और शिव चालीसा का पाठ करें।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, महाशिवरात्रि पर सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करने से भक्त को मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतोष प्राप्त होता है। पूजा और व्रत से जुड़े लाभ धार्मिक आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं।