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Pradosh Vrat Katha June 2026: प्रदोष व्रत की कथा से मिलती है भगवान शिव की विशेष कृपा

 

प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत शुभ और पवित्र व्रत माना जाता है। यह व्रत हर महीने के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के समय भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। कहा जाता है कि इस समय की गई आराधना से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

प्रदोष व्रत में केवल पूजा ही नहीं, बल्कि इसकी कथा का पाठ भी विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से प्रदोष व्रत की कथा सुनता या पढ़ता है, उस पर भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

कथा के अनुसार, प्रदोष काल में देवताओं और असुरों के बीच हुए संघर्ष के बाद भगवान शिव ने अपने भक्तों की रक्षा की थी और इसी कारण यह समय शिव आराधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

श्रद्धालु इस दिन उपवास रखकर शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करते हैं। साथ ही “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप भी विशेष रूप से किया जाता है।

कुल मिलाकर, प्रदोष व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आस्था और विश्वास का प्रतीक है, जो भक्तों को मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है।