Parivartini Ekadashi Vrat: परिवर्तिनी एकादशी किस दिन रखें? जानें पूजा की पूरी विधि, शुभ मुहूर्त और व्रत पारण का सही समय
हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। साल में कुल 24 एकादशियां आती हैं और हर एकादशी का अपना अलग धार्मिक महत्व बताया गया है। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है और इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं।
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं और इसी एकादशी पर करवट बदलते हैं। इसी वजह से इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इसे पार्श्व एकादशी, पद्मा एकादशी और वामन एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।इस बार एकादशी की तिथि को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति है। पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 21 सितंबर की शाम से शुरू होकर 22 सितंबर की शाम तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत 22 सितंबर 2026, मंगलवार को रखा जाएगा।
परिवर्तिनी एकादशी पर पूजा के शुभ मुहूर्त
22 सितंबर को पूजा-पाठ के लिए कई शुभ मुहूर्त बताए गए हैं।
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 6:03 बजे से 6:50 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 1:18 बजे से 2:07 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 3:45 बजे से शाम 4:34 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 7:49 बजे से रात 8:12 बजे तक
भक्त इन शुभ समयों में भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप और धार्मिक अनुष्ठान कर सकते हैं।
कब होगा एकादशी व्रत का पारण?
परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अगले दिन यानी 23 सितंबर 2026, बुधवार को व्रत का पारण करना होगा।
पारण का शुभ समय सुबह 7:38 बजे से 10:04 बजे तक बताया गया है। इस दिन द्वादशी तिथि शाम 7:20 बजे तक रहेगी।
मान्यता है कि एकादशी व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। हालांकि, व्रत और पूजा की विधि को लेकर अलग-अलग परंपराएं और स्थानीय पंचांगों में थोड़ा अंतर हो सकता है।