Krishna Janmashtami 2026: एक ही कुल में जन्मे कृष्ण और कंस, फिर कर्मों ने कैसे बदल दी दोनों की किस्मत?
एक बार कुछ भक्तों ने एक प्रसिद्ध चित्रकार से भगवान श्रीकृष्ण और कंस के चित्र बनाने का आग्रह किया। चित्रकार ने उनकी बात मान ली, लेकिन उसके सामने एक शर्त रखी। उसने कहा कि श्रीकृष्ण का चित्र बनाने के लिए उसे एक ऐसा नटखट और सुंदर बालक चाहिए, जिसके चेहरे पर मासूमियत झलकती हो। वहीं, कंस का चित्र बनाने के लिए उसे ऐसा व्यक्ति चाहिए, जिसके चेहरे और व्यक्तित्व में क्रूरता दिखाई दे।
भक्तों को एक सुंदर और मासूम बालक मिल गया। वे उसे चित्रकार के पास ले आए। चित्रकार ने बालक को सामने बैठाया और उसके हाव-भाव को देखकर भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का बेहद सुंदर चित्र तैयार कर दिया।
कंस का चित्र बनाने में आई परेशानी
अब चित्रकार के सामने कंस का चित्र बनाने की बारी थी। लेकिन इसके लिए उसे सही व्यक्ति नहीं मिल पा रहा था। भक्त कई लोगों को उसके पास लेकर आए, मगर चित्रकार को किसी के चेहरे पर कंस जैसे क्रूर भाव नजर नहीं आए।
समय बीतता गया और काफी प्रयासों के बाद भी कंस के चित्र के लिए उसे कोई उपयुक्त व्यक्ति नहीं मिला। आखिरकार भक्त उसे एक जेल में लेकर गए, जहां कई अपराधी बंद थे। वहां एक अपराधी को देखकर चित्रकार को लगा कि उसके चेहरे और हाव-भाव में कंस के व्यक्तित्व जैसी कठोरता दिखाई देती है।
चित्रकार ने उसी अपराधी को सामने बैठाकर कंस का चित्र बना दिया। चित्र पूरा होने के बाद भक्त काफी खुश हुए और उन्होंने चित्रकार की खूब प्रशंसा की। इसके बदले में उसे धन भी दिया गया।
कुछ समय बाद उस अपराधी ने भी अपना चित्र देखने की इच्छा जताई। चित्रकार ने उसे कंस का बनाया हुआ चित्र दिखाया। लेकिन तस्वीर देखते ही वह अपराधी फूट-फूटकर रोने लगा।
अपराधी ने बताई हैरान कर देने वाली सच्चाई
लोगों ने उससे पूछा कि वह तस्वीर देखकर इतना दुखी क्यों हो गया। तब उसने रोते हुए कहा कि शायद आप लोगों ने मुझे पहचाना नहीं। मैं वही बच्चा हूं, जिसकी तस्वीर आपने कई साल पहले भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप में बनाई थी।
उसने कहा कि बचपन में मेरे चेहरे पर मासूमियत थी, लेकिन समय के साथ मैं गलत संगति, बुरी आदतों और कुकर्मों में फंसता चला गया। मेरे कर्मों ने मेरे व्यक्तित्व को पूरी तरह बदल दिया। आज उसी वजह से मैं एक अपराधी बन चुका हूं।
उसने कहा, “इस तस्वीर में कृष्ण भी मैं ही हूं और कंस भी मैं ही हूं।”
उसकी बात सुनकर वहां मौजूद सभी लोग हैरान रह गए।
कर्म ही बनाते हैं इंसान की पहचान
तब चित्रकार ने लोगों को समझाया कि इंसान की पहचान केवल उसके जन्म या रूप से नहीं होती, बल्कि उसके कर्म, आचरण और संगति उसके व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं।
जिस बालक में कभी मासूमियत और प्रेम दिखाई देता था, वही गलत संगति और बुरी आदतों के कारण धीरे-धीरे ऐसे रास्ते पर चला गया, जिसने उसके व्यक्तित्व को बदल दिया। इस तरह वह समाज की नजर में कंस जैसे क्रूर व्यक्ति के रूप में पहचाना जाने लगा।
यह दृष्टांत हमें यही सीख देता है कि अच्छे कर्म इंसान को महान बनाते हैं, जबकि गलत कर्म उसके व्यक्तित्व और जीवन की दिशा बदल सकते हैं। इसलिए जीवन में संगति, आचरण और कर्मों का हमेशा ध्यान रखना चाहिए।