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3 साल में एक बार आती है पद्मिनी एकादशी, जानिए कब रखा जाएगा व्रत और क्या है इसका महत्व

 

हिंदू पंचांग में Padmini Ekadashi का विशेष महत्व माना जाता है। यह एकादशी हर साल नहीं आती, बल्कि अधिकमास के दौरान लगभग 3 साल में एक बार पड़ती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिकमास में आने वाली एकादशी बेहद पुण्यदायी मानी जाती है और भगवान Vishnu की कृपा प्राप्त करने के लिए इस दिन व्रत और पूजा की जाती है।

अधिकमास में कुल दो विशेष एकादशी आती हैं। पहली को पद्मिनी या कमला एकादशी कहा जाता है, जबकि दूसरी को पद्मा और कमला एकादशी के नाम से जाना जाता है। खास बात यह है कि अधिकमास में निर्जला एकादशी नहीं पड़ती।

कब है पद्मिनी एकादशी?

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, अधिकमास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पद्मिनी एकादशी मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु और मां Lakshmi की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर सुख, समृद्धि और पुण्य की प्राप्ति होती है।

क्यों खास मानी जाती है यह एकादशी?

पद्मिनी एकादशी का महत्व इसलिए भी ज्यादा माना जाता है क्योंकि यह हर वर्ष नहीं आती। अधिकमास स्वयं ही बेहद शुभ माना जाता है और इस दौरान किए गए पूजा-पाठ, दान और व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।

धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि इस एकादशी का व्रत करने से जीवन के कष्ट कम होते हैं और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

पूजा और व्रत की विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें
  • भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें
  • तुलसी दल, पीले फूल और प्रसाद अर्पित करें
  • व्रत रखकर विष्णु मंत्रों का जाप करें
  • जरूरतमंदों को दान करना शुभ माना जाता है

क्या है धार्मिक मान्यता?

मान्यता है कि पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से पापों से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है। कई लोग आर्थिक समृद्धि, मानसिक शांति और पारिवारिक खुशहाली के लिए भी यह व्रत रखते हैं।

मंदिरों में दिखता है विशेष उत्साह

देशभर के विष्णु मंदिरों में इस दिन विशेष पूजा और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। भक्त पूरे श्रद्धा भाव से भगवान विष्णु की आराधना करते हैं।

धार्मिक विशेषज्ञों के मुताबिक, अधिकमास को आध्यात्मिक साधना और भगवान की भक्ति के लिए बेहद शुभ समय माना जाता है। यही वजह है कि पद्मिनी एकादशी को भी अत्यंत फलदायी और दुर्लभ व्रत माना जाता है।