भाद्रपद पूर्णिमा पर आज इन जगहों पर जरूर जलाएं दीया, घर में सुख-शांति के लिए जानें सही नियम
भाद्रपद पूर्णिमा को हिंदू धर्म में विशेष महत्व दिया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, स्नान-दान और व्रत के साथ शाम के समय दीपक जलाने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा की शाम घर में दीपक जलाने से सकारात्मक वातावरण बना रहता है और देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हालांकि दीपक जलाने से जुड़े नियम अलग-अलग परंपराओं और क्षेत्रों में कुछ भिन्न हो सकते हैं।
मुख्य द्वार पर जलाएं दीया
पूर्णिमा की शाम घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि मुख्य द्वार घर में प्रवेश का स्थान होता है, इसलिए यहां दीपक जलाने से घर का वातावरण सकारात्मक बना रहता है। दीपक को साफ जगह पर रखना चाहिए और उसके आसपास गंदगी नहीं होनी चाहिए।
तुलसी के पौधे के पास
हिंदू परंपरा में तुलसी के पौधे को पवित्र माना जाता है। शाम के समय तुलसी के पास दीपक जलाने की परंपरा है। दीपक रखते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि उसकी लौ या गर्मी से पौधे को नुकसान न पहुंचे।
पूजा स्थल में दीपक
घर के मंदिर या पूजा स्थल पर भी शाम के समय दीपक जलाया जा सकता है। भगवान विष्णु की पूजा करने वाले श्रद्धालु पूजा के दौरान घी या तेल का दीपक जला सकते हैं। इसके बाद भगवान की आरती और मंत्र जाप करने की परंपरा है।
रसोई में भी जलाने की परंपरा
कुछ पारंपरिक मान्यताओं में रसोईघर को अन्न और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए कई परिवारों में विशेष धार्मिक अवसरों पर रसोई के साफ स्थान पर भी दीपक जलाने की परंपरा है। दीपक हमेशा ऐसी जगह रखना चाहिए जहां आग लगने का खतरा न हो।
घर की बालकनी या आंगन में
अगर घर में आंगन या खुली बालकनी है तो वहां भी दीपक जलाया जा सकता है। खासकर पूर्णिमा की शाम चंद्रमा के दर्शन और पूजा के समय घर में दीप प्रज्वलित करने की परंपरा कई परिवारों में निभाई जाती है।
दीपक जलाने का सही तरीका
दीपक जलाने से पहले उस स्थान को साफ कर लें। दीपक में घी या तेल डालकर रूई की बत्ती रखें और पूजा के बाद श्रद्धा से दीप प्रज्वलित करें। दीपक ऐसी सुरक्षित जगह पर रखें जहां हवा से वह आसानी से न बुझे और आसपास कपड़ा, कागज या कोई ज्वलनशील वस्तु न हो।
ध्यान रखें कि दीपक जलाने से जुड़े ये उपाय धार्मिक और लोक-मान्यताओं पर आधारित हैं। इनके परिणामों की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है। अपनी आस्था और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा-पाठ और दीप प्रज्वलन किया जा सकता है।