सिर्फ सजने-संवरने के लिए नहीं! पति की लंबी उम्र की कामना से जुड़ा है 16 श्रृंगार, करवाचौथ पर क्यों है जरूरी?
हिंदू धर्म में, सुहागिन महिलाओं के लिए 'सोलह श्रृंगार' करने की परंपरा सदियों पुरानी है। जब बात करवाचौथ के पर्व की हो तब इसका महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है। सोलह श्रृंगार को सौंदर्य, वैवाहिक सुख और शाश्वत सुंदरता का प्रतीक माना जाता है।
यह महिलाओं की खूबसूरती में चार-चांद लगा देता है। मुख्य रूप से मेहंदी को करवाचौथ के लिए जरूरी माना जाता है और ऐसा कहा जाता है कि हाथों को मेहंदी से सजाए बिना करवा चौथ का व्रत अधूरा होता है।
माता पार्वती के दिव्य प्रतीकों से गहराई से जुड़े सोलह श्रृंगार को न सिर्फ सौंदर्य के प्रसाधन के रूप में देखा जाता है बल्कि अखंड सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है। सोलह श्रृंगार में मौजूद हर सामग्री का अपना अलग महत्व है और ये सौभाग्य की निशानी मानी जाती हैं। आइए आपको बताते हैं करवा चौथ के पर्व में सोलह श्रृंगार का क्या महत्व है और मुख्य रूप से मेहंदी का क्या महत्व होता है?
सोलह श्रृंगार में कौन से चीजें होती हैं?
सोलह श्रृंगार में मुख्य रूप से सोलह ऐसी चीजें मौजूद होती हैं, जो सौभाग्य से जुड़ी होती हैं और जो किसी भी सुहागिन महिला के लिए सुहाग का प्रतीक मानी जाती हैं। हर सामग्री का अपना लगा महत्व होता है। आइए जानें इसके बारे में।
सिंदूर: विवाहित महिलाओं के लिए मांग में सिंदूर लगाना बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसे सुहाग की अनिवार्य सामग्री माना जाता है, मुख्य रूप से करवाचौथ के दिन यह प्रेम और समृद्धि का प्रतीक होता है।
बिंदी: माथे के बीचों-बीच लगाई जाने वाली बिंदी किसी भी महिला की खूबसूरती को बढ़ाती है। यह शुभता की प्रतीक मानी जाती है।
काजल: आंखों में लगाया जाने वाला काला काजल आंखों को सुंदर बनाता है और वैवाहिक रिश्ते को बुरी नजर से भी बचाता है। इसे करवाचौथ पर जरूर लगाएं।
मेहंदी: करवाचौथ के दिन मेहंदी लगाना सबसे जरूरी माना जाता है और मेहंदी के रंग के साथ वैवाहिक रिश्ता भी मजबूत होता है। मेहंदी खुशी, सौभाग्य और प्रेम प्रतीक मानी जाती है।
चूड़ियां: सुहाग की सामग्री के रूप में कांच की चूड़ियां वैवाहिक जीवन में समृद्धि का संकेत देती हैं और सोलह श्रृंगार का अहम् हिस्सा होती हैं।
मंगलसूत्र: मंगलसूत्र को वैवाहिक वचन, एकता और जीवन के सफर की एक सामग्री माना जाता है। इसे करवाचौथ के दिन पहनना जरूरी होता है।
मांग टीका: इसे माथे पर सजाया जाता है और यह सुहानिन महिलाओं की खूबसूरती को और बढ़ाता है।
गले का हार:करवाचौथ पूजा में गले में हार पहनना जरूरी माना जाता है। यह किसी भी त्योहार की चमक को और बढ़ाता है।
बिछिया- वैवाहिक जीवन की सबसे बड़ी निशानी मानी जाने वाली बिछिया करवा चौथ के दिन जरूर पहननी चाहिए। कोशिश करें कि इस दिन नई बिछिया लाएं।
बाजूबंदऔर कमरबंद: ये दोनों आभूषण पारंपरिक सौंदर्य को और निखारते हैं और वैवाहिक जीवन में सकारात्मक ऊर्जा जोड़ते हैं।
पायल: पायल की छमछम वैवाहिक जीवन में खुशहाली लाती है और सोलह श्रृंगार को पूर्ण बनाती है।
ताजे फूलों का गजरा: गजरे में लगे खूबसूरत फूल भी सुहाग की सामग्री माने जाते हैं और मुख्य रूप से करवा चौथ के दिन इसे बालों में लगाने से आपसी प्रेम बढ़ता है।
आलता: करवा चौथ पर आलता से पैरों को सजाना पूजा और श्रृंगार का एक जरूरी हिस्सा माना जाता है। इसका लाल रंग पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत करता है।
लाल साड़ी: लाल रंग को प्रेम का प्रतीक माना जाता है और इसी वजह से करवा चौथ के दिन इसी रंग की साड़ी या कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है।
नथ: करवा चौथ एक दिन नथ पहनना जरूरी होता है क्योंकि नथ से ही चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है।
कान के झुमके: कान में पहने जाने वाले झुमके खूबसूरती बढ़ाने के साथ सोलह श्रृंगार का अहम हिस्सा भी माने जाते हैं।
करवाचौथ के दिन मेहंदी लगाना जरूरी क्यों है?
मेहंदी सदियों से किसी भी शादी, त्योहार या अन्य अवसरों का मुख्य हिस्सा रही है, लेकिन इसे करवा चौथ के दिन हाथों में सजाना सुहागिन महिलाओं के लिए जरूरी माना जाता है।
यह सोलह श्रृंगार का हिस्सा होने के साथ वैवाहिक जीवन को खुशहाल बनाए रखने के लिए भी जरूरी होता है। करवा चौथ के पर्व में हाथों में मेहंदी लगाना अखंड सौभाग्य का प्रतीक होने के साथ पति की दीर्घायु की कामना के लिए भी जरूरी होता है।
अगर आप भी करवाचौथ के दिन सोलह श्रृंगार करती हैं और हाथों में मेहंदी लगाती हैं, तो इससे व्रत और पूजा को पूर्णता और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।