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Nirjala Ekadashi Vrat 2026: निर्जला एकादशी से एक दिन पहले यानी दशमी तिथि पर करें ये काम, मिलेगा व्रत का पूर्ण फल

 

सनातन धर्म में निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ और पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक निर्जला एकादशी का व्रत करता है, उसे वर्षभर की सभी 24 एकादशियों के व्रत के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। यही कारण है कि इसे सबसे बड़ी एकादशी भी कहा जाता है।

ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाने वाली निर्जला एकादशी का व्रत केवल एक दिन की साधना नहीं माना जाता, बल्कि इसकी तैयारी दशमी तिथि से ही शुरू हो जाती है। धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि यदि दशमी के दिन कुछ नियमों का पालन किया जाए तो व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।

दशमी तिथि से ही शुरू हो जाती है व्रत की तैयारी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत करने वाले व्यक्ति को दशमी तिथि से ही अपने आचरण और खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इससे शरीर और मन दोनों व्रत के लिए तैयार होते हैं।

दशमी तिथि पर क्या करें?

सात्विक भोजन ग्रहण करें

दशमी के दिन केवल सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है। भोजन में हल्का और सुपाच्य आहार लेना शुभ माना जाता है। अधिक मसालेदार, तामसिक और भारी भोजन से बचना चाहिए।

ब्रह्मचर्य का पालन करें

शास्त्रों के अनुसार दशमी से लेकर द्वादशी तक ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। इससे मन और इंद्रियों पर नियंत्रण बना रहता है।

क्रोध और विवाद से बचें

दशमी तिथि पर मन को शांत रखने का प्रयास करें। किसी से झगड़ा, कटु वचन या विवाद करने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि शांत मन से किया गया व्रत अधिक फलदायी होता है।

भगवान विष्णु का स्मरण करें

दशमी के दिन से ही भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप और नाम स्मरण शुरू कर देना चाहिए। इससे मन में भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

समय पर भोजन करें

दशमी तिथि में सूर्यास्त से पहले भोजन कर लेना शुभ माना जाता है। कई परंपराओं में रात्रि भोजन से परहेज करने की भी सलाह दी जाती है।

दशमी तिथि पर किन चीजों से करें परहेज?

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार दशमी के दिन कुछ चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए—

  • चावल और चावल से बने खाद्य पदार्थ
  • मांस-मदिरा और नशीली वस्तुएं
  • लहसुन और प्याज
  • अत्यधिक तला-भुना भोजन
  • झूठ बोलना और किसी का अपमान करना

निर्जला एकादशी व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इस दिन श्रद्धालु बिना अन्न और जल ग्रहण किए व्रत रखते हैं तथा भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं। माना जाता है कि इस व्रत से पापों का क्षय होता है और जीवन में सुख, समृद्धि एवं शांति आती है।

व्रत का पूर्ण फल पाने के लिए

  • दशमी से ही नियमों का पालन शुरू करें।
  • एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
  • विष्णु सहस्रनाम या "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें।
  • जरूरतमंदों को दान दें।
  • द्वादशी तिथि में विधि-विधान से पारण करें।