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Nirjala Ekadashi Muhurat and Puja Time 2026: निर्जला एकादशी व्रत से जुड़े 13 जरूरी सवाल और उनके जवाब

 

हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है और श्रद्धालु अन्न एवं जल का त्याग कर व्रत रखते हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से वर्षभर की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। आइए जानते हैं निर्जला एकादशी से जुड़े 13 महत्वपूर्ण सवालों के जवाब।

1. निर्जला एकादशी 2026 कब है?

वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून, गुरुवार को रखा जाएगा।

2. निर्जला एकादशी का महत्व क्या है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने, पापों के नाश और मोक्ष की प्राप्ति के लिए किया जाता है। इसे वर्ष की सबसे पुण्यदायी एकादशी माना जाता है।

3. निर्जला एकादशी का व्रत क्यों रखा जाता है?

मान्यता है कि जो लोग सालभर की सभी एकादशियां नहीं रख पाते, वे निर्जला एकादशी का व्रत रखकर सभी एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।

4. क्या निर्जला एकादशी में पानी पी सकते हैं?

पारंपरिक नियमों के अनुसार इस व्रत में अन्न और जल दोनों का त्याग किया जाता है। हालांकि स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर व्यक्ति अपनी क्षमता और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार व्रत कर सकता है।

5. पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त और प्रातःकाल पूजा के लिए शुभ माने जाते हैं। भगवान विष्णु की पूजा सूर्योदय के बाद स्नान कर करनी चाहिए।

6. किस भगवान की पूजा की जाती है?

निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु, श्रीहरि नारायण और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

7. पूजा में क्या अर्पित करें?

भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले फूल, पंचामृत, फल और मिठाई अर्पित करना शुभ माना जाता है।

8. कौन-सा मंत्र जपना चाहिए?

"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना जाता है। विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी किया जाता है।

9. क्या निर्जला एकादशी पर तुलसी पूजा करनी चाहिए?

जी हां, तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इस दिन तुलसी के समक्ष दीपक जलाकर पूजा करना शुभ माना जाता है।

10. इस दिन क्या दान करना चाहिए?

जल से भरा घड़ा, छाता, पंखा, वस्त्र, फल, अन्न और दक्षिणा का दान अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

11. निर्जला एकादशी पर क्या नहीं करना चाहिए?

  • क्रोध और विवाद से बचें।
  • झूठ और छल-कपट न करें।
  • तामसिक भोजन का सेवन न करें।
  • किसी का अपमान न करें।
  • नकारात्मक विचारों से दूर रहें।

12. व्रत का पारण कब किया जाता है?

द्वादशी तिथि में शुभ मुहूर्त के दौरान भगवान विष्णु की पूजा के बाद व्रत का पारण किया जाता है।

13. क्या निर्जला एकादशी की कथा पढ़ना जरूरी है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी की भीमसेनी एकादशी कथा का पाठ या श्रवण करना शुभ माना जाता है। इससे व्रत पूर्ण माना जाता है।

निर्जला एकादशी पर करें ये शुभ कार्य

  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • तुलसी पूजा और दीपदान करें।
  • जरूरतमंदों को जल, फल और वस्त्र दान दें।
  • भजन-कीर्तन और सत्संग में भाग लें।

निर्जला एकादशी का धार्मिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत भीमसेन ने महर्षि वेदव्यास के कहने पर रखा था। तभी से इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। यह व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करने पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।