Navratri Saptami Kab: सप्तमी तिथि दो दिन, व्रत का मान्य किस दिन? पढ़ें ज्योतिर्विद की सटीक राय
शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व है। नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना की जाती है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और सुख-समृद्धि, साहस तथा परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। साल 2026 में सप्तमी तिथि दो सूर्योदय तक रहने के कारण व्रत की तारीख को लेकर श्रद्धालुओं के बीच भ्रम की स्थिति बन सकती है। ऐसे में सवाल है कि सप्तमी का व्रत 17 अक्टूबर को रखा जाएगा या 18 अक्टूबर को?
नवरात्रि में सप्तमी व्रत कब रखा जाएगा?
लाइव हिन्दुस्तान में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के मुताबिक, शारदीय नवरात्रि 2026 में सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर को शुरू होगी और 18 अक्टूबर की सुबह 8 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। दोनों दिन सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि रहने के कारण तिथि दो सूर्योदय तक मानी जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, सप्तमी व्रत 17 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा।
धार्मिक व्रतों में तिथि के साथ सूर्योदय और संबंधित पूजा की परंपरा को भी महत्व दिया जाता है। अलग-अलग क्षेत्रीय पंचांगों या पारिवारिक परंपराओं में पूजा-विधान में अंतर हो सकता है, इसलिए व्रत रखने से पहले स्थानीय पंचांग से पुष्टि करना उचित रहेगा।
सप्तमी के दिन होती है मां कालरात्रि की पूजा
नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। देवी का स्वरूप उग्र माना जाता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं में उन्हें अपने भक्तों का कल्याण करने वाली और भय दूर करने वाली देवी बताया गया है।
मां कालरात्रि की पूजा करते समय भक्त स्वच्छता और सात्विकता का ध्यान रखते हैं। पूजा में फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित कर देवी से सुख-शांति और साहस की प्रार्थना की जाती है।
मां कालरात्रि की पूजा का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि की आराधना से भय, नकारात्मकता और जीवन की बाधाओं से मुकाबला करने का साहस मिलता है। भक्त इस दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और मां के मंत्रों का जाप करते हैं।
नवरात्रि के दौरान पूजा-पाठ के साथ जरूरतमंद लोगों की सहायता करना, विनम्र व्यवहार रखना और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी शुभ माना जाता है।
सप्तमी व्रत में इन बातों का रखें ध्यान
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व्रत अपनी श्रद्धा, स्वास्थ्य और सामर्थ्य के अनुसार रखें।
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पूजा स्थल और घर में स्वच्छता बनाए रखें।
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पूजा के दौरान मां कालरात्रि का ध्यान करें और परिवार की सुख-शांति की कामना करें।
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व्रत के नियमों को लेकर असमंजस हो तो अपने स्थानीय पंचांग या ज्योतिर्विद से सलाह लें।