नवरात्रि 2026: बड़ी पटन देवी मंदिर में सुबह से भक्तों का तांता, जानिए 51 शक्तिपीठों में से एक इस धाम की महिमा
बिहार की राजधानी पटना के पटना सिटी में स्थित बड़ी पटन देवी मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। खासकर शारदीय नवरात्रि के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है और यहां माता सती की दायीं जांघ गिरी थी। नवरात्रि के अवसर पर भक्त मां के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं।
इस प्राचीन मंदिर की सबसे खास बात यहां स्थापित मां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की प्रतिमाएं हैं। आइए जानते हैं बड़ी पटन देवी मंदिर का धार्मिक महत्व, इससे जुड़ी पौराणिक मान्यताएं और पूजा की खास परंपराएं।
माता सती से जुड़ी है शक्तिपीठ की पौराणिक कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राजा दक्ष प्रजापति ने एक यज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें भगवान शिव का अपमान किया गया। इससे दुखी होकर माता सती ने यज्ञ की अग्नि में अपने प्राण त्याग दिए। पत्नी के वियोग में भगवान शिव उनके पार्थिव शरीर को लेकर तांडव करने लगे।
मान्यता है कि सृष्टि को इस संकट से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर को खंडित किया। उनके शरीर के अंग अलग-अलग स्थानों पर गिरे, जिन्हें बाद में शक्तिपीठ के रूप में मान्यता मिली।
इसी परंपरा के अनुसार, पटना सिटी स्थित बड़ी पटन देवी मंदिर में माता सती की दायीं जांघ गिरी थी। यही वजह है कि इस मंदिर को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है।
महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के होते हैं दर्शन
बड़ी पटन देवी मंदिर में काले पत्थर से बनी तीन प्राचीन प्रतिमाएं स्थापित हैं। यहां मां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की पूजा की जाती है। ये तीनों स्वरूप शक्ति, समृद्धि और ज्ञान के प्रतीक माने जाते हैं।
मंदिर के महंत विजय शंकर गिरी के अनुसार, माता को पटना नगर की रक्षक देवी भी माना जाता है। श्रद्धालुओं के बीच यह मान्यता भी प्रचलित है कि माता आधी रात को नगर भ्रमण के लिए निकलती हैं।
मंदिर परिसर में स्थित योनि कुंड से भी कई धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इसमें हवन सामग्री डालने पर वह पाताल तक पहुंच जाती है। ये मान्यताएं मंदिर की प्राचीन धार्मिक परंपराओं का हिस्सा हैं।
दिन और रात में अलग-अलग भोग लगाने की परंपरा
मंदिर में पूजा-अर्चना की अपनी विशेष परंपराएं हैं। बताया जाता है कि दिन के समय देवी को कच्चे भोजन का भोग लगाया जाता है, जबकि रात में पक्के भोजन का भोग लगाने की परंपरा है।
नवरात्रि और दुर्गा पूजा के दौरान यहां वैदिक विधि से सार्वजनिक पूजा की जाती है। इसके अलावा रात में कुछ समय के लिए तांत्रिक पूजा भी होती है, जिसके दौरान मंदिर के कपाट बंद रखे जाते हैं।
मंदिर को कालिका मंत्र की सिद्धि से जुड़ी परंपराओं के लिए भी जाना जाता है। नवरात्रि के दिनों में इन अनुष्ठानों के कारण मंदिर में विशेष धार्मिक माहौल रहता है।
सुबह मंगला आरती से शुरू होती है पूजा
सामान्य दिनों में मंदिर में सुबह करीब 5 बजे पूजा शुरू होती है। इसके बाद सुबह 5:30 बजे मंगला आरती की जाती है और माता का भव्य श्रृंगार होता है। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए जाते हैं।
मंगलवार और शनिवार को यहां आम दिनों की तुलना में अधिक भीड़ देखने को मिलती है। वहीं, दुर्गा पूजा और दशहरा के दौरान अष्टमी तथा नवमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इन दिनों रात 12 बजे से ही भक्तों की कतारें लगने की बात कही जाती है।
आठ करोड़ रुपये से जीर्णोद्धार की योजना, काम में देरी की शिकायत
बड़ी पटन देवी मंदिर की धार्मिक महत्ता के साथ-साथ इसके संरक्षण और विकास का मुद्दा भी चर्चा में रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मंदिर के गर्भगृह में तीनों देवियों की प्रतिमाओं की स्थापना और मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से आठ करोड़ रुपये की राशि दी गई थी।
हालांकि, स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य में देरी को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि पांच साल बीतने के बाद भी जीर्णोद्धार का काम पूरा नहीं हो सका। मंदिर के महंत विजय शंकर गिरी के अनुसार, निर्माण कार्य निर्धारित समय पर पूरा नहीं हुआ और काम भी बंद हो गया था।
महंत ने बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंदिर के जीर्णोद्धार का काम जल्द पूरा कराने का आश्वासन दिया है।
नवरात्रि में क्यों खास है बड़ी पटन देवी मंदिर?
बड़ी पटन देवी मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि बिहार की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। माता सती से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं, तीन देवियों की प्रतिमाएं और सदियों से चली आ रही पूजा परंपराएं इसे खास बनाती हैं। नवरात्रि के दौरान यहां उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ इस मंदिर के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दर्शाती है।