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करवा चौथ में चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में, 3 राजयोग भी, कथा पढ़ने के लिए यह बेस्ट मुहूर्त?
 

 

करवा चौथ का व्रत इस साल 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। इस बार चंद्रमा के रोहिणी नक्षत्र में रहने और कई शुभ ज्योतिषीय योग बनने की चर्चा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखती हैं। शाम को भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की पूजा के साथ व्रत कथा सुनने या पढ़ने की परंपरा है।

करवा चौथ पर पूजा और कथा का शुभ मुहूर्त

करवा चौथ की पूजा प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है। जयपुर के पंचांग के अनुसार, इस साल पूजा का मुहूर्त शाम 5:46 से 7:03 बजे तक रहेगा। व्रत कथा पूजा के दौरान इसी समय पढ़ी या सुनी जा सकती है।

करवा चौथ की तारीख

गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026

पूजा और कथा का मुहूर्त

शाम 5:46 से 7:03 बजे तक, जयपुर

चंद्र दर्शन का संभावित समय

रात लगभग 8:28 बजे, जयपुर

समय स्थान के अनुसार बदल सकता है।

रोहिणी नक्षत्र में चंद्रमा का क्या है महत्व?

ज्योतिषीय मान्यताओं में रोहिणी नक्षत्र को शुभ और समृद्धि से जुड़ा माना जाता है। चंद्रमा को इस नक्षत्र में उच्च राशि वृषभ में स्थित माना जाता है। धार्मिक विश्वास है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम, सामंजस्य और सुख-शांति की कामना की जाती है।

करवा चौथ पर कौन से 3 राजयोग बनेंगे?

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस दिन सूर्य, बुध और शुक्र की तुला राशि में स्थिति के आधार पर तीन प्रमुख योगों की चर्चा की जा रही है।

  • बुधादित्य राजयोग: सूर्य और बुध की युति से बनने वाला योग, जिसे बुद्धि और मान-सम्मान से जोड़ा जाता है।

  • त्रिग्रही योग: एक ही राशि में तीन ग्रहों की उपस्थिति से बनने वाला योग।

  • लक्ष्मी नारायण योग: बुध और शुक्र की युति से बनने वाला योग, जिसे सुख-सुविधाओं और समृद्धि से जोड़ा जाता है।

    इन योगों के फल ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इनसे जीवन में निश्चित लाभ होने की गारंटी नहीं मानी जानी चाहिए।

करवा चौथ की कथा कब पढ़ें?

व्रत कथा शाम को पूजा के समय पढ़ना या परिवार की अन्य महिलाओं के साथ सुनना पारंपरिक विधि का हिस्सा है। आप पहले गणेश जी और करवा माता की पूजा करें, फिर करवा चौथ की कथा पढ़ें और व्रत की आरती करें। चंद्रमा निकलने पर अर्घ्य देकर परंपरा के अनुसार व्रत खोलें।

क्या रोहिणी नक्षत्र में कथा पढ़ना सबसे अच्छा मुहूर्त है? कथा पढ़ने के लिए पूजा का निर्धारित शुभ समय अधिक व्यावहारिक विकल्प है। रोहिणी नक्षत्र का संयोग धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है, लेकिन कथा के लिए उसी नक्षत्र के किसी एक मिनट को अनिवार्य या सर्वश्रेष्ठ बताने का आधार उपलब्ध नहीं है।