☰
×

Maha Navami 2026: 19 अक्टूबर को महानवमी, जानें कन्या पूजन और हवन का शुभ मुहूर्त
 

 

शारदीय नवरात्रि में महा नवमी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि के अंतिम दिनों में भक्त कन्या पूजन, हवन और विशेष पूजा-पाठ करके माता रानी से सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।

महानवमी के अवसर पर घरों और मंदिरों में सुबह से ही पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। कन्या पूजन में छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका सम्मान किया जाता है, उन्हें भोजन कराया जाता है और सामर्थ्य के अनुसार उपहार दिए जाते हैं। हालांकि, पूजा की सही तिथि और शुभ मुहूर्त निर्धारित करने के लिए स्थानीय पंचांग और नवमी तिथि के समय का ध्यान रखना जरूरी है।

महानवमी 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त

जयपुर के पंचांग के अनुसार, महानवमी की तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे शुरू होकर 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे तक रहेगी। 19 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:19 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक बताया गया है।ध्यान दें कि अष्टमी और नवमी की तिथि को लेकर अलग-अलग पंचांगों में समय का अंतर हो सकता है। इसलिए कन्या पूजन और हवन करने से पहले स्थानीय पंचांग से शुभ समय की पुष्टि कर लें।

कन्या पूजन की विधि

महानवमी के दिन सुबह स्नान करके मां दुर्गा और मां सिद्धिदात्री की पूजा करें। इसके बाद कन्याओं को आदरपूर्वक घर बुलाकर आसन पर बैठाएं। उनके पैर धोकर तिलक लगाएं और हलवा, पूरी तथा चने का प्रसाद खिलाएं। भोजन के बाद अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा या उपहार दें और कन्याओं का आशीर्वाद लें।

महानवमी पर हवन का महत्व

नवरात्रि में हवन को पूजा और साधना की पूर्णता से जोड़कर देखा जाता है। भक्त मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करते हुए हवन करते हैं और परिवार की सुख-शांति, समृद्धि तथा कल्याण की प्रार्थना करते हैं। हवन के बाद आरती और प्रसाद वितरण किया जाता है।महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ नवरात्रि के नौ दिनों के अनुष्ठान पूरे करने की परंपरा है। व्रत का पारण अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार करें।