माँ भगवती स्तोत्र: दुर्गा स्तोत्र का महत्व, पाठ और धार्मिक मान्यता
मां दुर्गा को शक्ति, साहस और रक्षा की देवी माना जाता है। मां भगवती स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ देवी की आराधना के लिए किया जाता है। नवरात्रि, शुक्रवार और दुर्गा पूजा के अवसर पर इसके पाठ की विशेष धार्मिक मान्यता है। सुबह स्नान के बाद स्वच्छ स्थान पर बैठकर मां भगवती का ध्यान करते हुए स्तोत्र का पाठ किया जा सकता है।
॥ श्री दुर्गा स्तोत्रम् ॥
नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः।
नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्म ताम्॥
रौद्रायै नमो नित्यायै गौर्यै धात्र्यै नमो नमः।
ज्योत्स्नायै चेन्दुरूपिण्यै सुखायै सततं नमः॥
कल्याण्यै प्रणतां वृद्ध्यै सिद्ध्यै कुर्मो नमो नमः।
नैऋत्यै भूभृतां लक्ष्म्यै शर्वाण्यै ते नमो नमः॥
दुर्गायै दुर्गपारायै सारायै सर्वकारिण्यै।
ख्यात्यै तथैव कृष्णायै धूम्रायै सततं नमः॥
अतिसौम्यातिरौद्रायै नतास्तस्यै नमो नमः।
नमो जगत्प्रतिष्ठायै देव्यै कृत्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मां भगवती की पूजा कैसे करें?
सुबह स्नान करने के बाद पूजा स्थल की सफाई करें और मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं। मां को लाल फूल, अक्षत और अपनी श्रद्धा के अनुसार प्रसाद अर्पित करें। इसके बाद दुर्गा स्तोत्र का पाठ करें। पाठ के दौरान मन को शांत और एकाग्र रखें। अंत में मां भगवती की आरती करके परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
दुर्गा स्तोत्र पाठ का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार मां दुर्गा का स्मरण और स्तोत्र पाठ भक्त को आत्मबल, साहस और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने में सहायक माना जाता है। नवरात्रि में सुबह और शाम मां की पूजा के साथ दुर्गा स्तोत्र का पाठ विशेष रूप से किया जाता है।