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चंद्र ग्रहण और रक्षा बंधन 2026: क्या राखी के त्योहार पर पड़ेगा ग्रहण का असर? जानें सूतक और शुभ मुहूर्त से जुड़ी जानकारी

 

हिंदू धर्म में रक्षा बंधन का त्योहार भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। वहीं, चंद्र ग्रहण को भी धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण घटना माना जाता है। साल 2026 में श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन रक्षा बंधन पड़ने और इसी समय चंद्र ग्रहण की चर्चा होने से लोगों के बीच राखी बांधने के समय और ग्रहण के प्रभाव को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से लगभग 9 घंटे पहले प्रारंभ हो जाता है। इस वजह से कई लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या सूतक काल में राखी बांधना शुभ होगा या नहीं।

रक्षा बंधन और चंद्र ग्रहण का संबंध

पंचांग के अनुसार रक्षा बंधन श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वहीं, ग्रहण काल को लेकर धार्मिक परंपराओं में कुछ नियम बताए गए हैं।मान्यता है कि सूतक काल के दौरान शुभ कार्यों को करने से बचना चाहिए। इसी कारण यदि ग्रहण और रक्षा बंधन एक ही दिन पड़ते हैं तो राखी बांधने के शुभ समय को लेकर विशेष सावधानी बरती जाती है।

क्या सूतक काल में बांध सकते हैं राखी?

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सूतक काल के दौरान पूजा-पाठ और शुभ कार्यों को सीमित करने की परंपरा रही है। इसलिए कई लोग सूतक शुरू होने से पहले या ग्रहण समाप्त होने के बाद राखी बांधना शुभ मानते हैं।हालांकि, रक्षा बंधन का सही समय स्थान, पंचांग और ग्रहण की स्थिति के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। इसलिए अपने क्षेत्र के स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त देखना उचित माना जाता है।

राखी बांधने का शुभ समय कैसे तय करें?

रक्षा बंधन के दिन मुख्य रूप से इन बातों का ध्यान रखा जाता है:

  • भद्रा काल समाप्त होने के बाद राखी बांधना शुभ माना जाता है।
  • ग्रहण और सूतक काल के समय शुभ कार्यों से बचने की मान्यता है।
  • स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के अनुसार मुहूर्त में अंतर हो सकता है।

ग्रहण के दौरान धार्मिक मान्यताएं

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण के समय मंत्र जाप, ध्यान और भगवान का स्मरण करना शुभ माना जाता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और दान करने की परंपरा भी कई स्थानों पर प्रचलित है।

वैज्ञानिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण

विज्ञान के अनुसार चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इससे कुछ समय के लिए चंद्रमा का प्रकाश कम दिखाई देता है।रक्षा बंधन और चंद्र ग्रहण को लेकर बनी स्थिति में किसी भी निर्णय के लिए स्थानीय पंचांग और परंपराओं का ध्यान रखना बेहतर माना जाता है।