☰
×

करवा चौथ पर जरूर सुनें व्रत कथा, वीडियो में जानें कैसे वीरावती को दोबारा मिला पति का जीवन

 

करवा चौथ का व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। करवा चौथ का पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान गणेश, माता पार्वती, भगवान शिव और करवा माता की पूजा की जाती है। शाम को करवा चौथ की व्रत कथा सुनने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।

करवा चौथ व्रत कथा

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/AjWj8KUH2t4?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/AjWj8KUH2t4/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक साहूकार के सात बेटे और एक बेटी थी, जिसका नाम वीरावती था। वीरावती अपने भाइयों की लाडली थी। विवाह के बाद जब उसका पहला करवा चौथ आया, तो उसने अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखा। दिनभर भूखी-प्यासी रहने के कारण शाम होते-होते वह काफी कमजोर हो गई और उसे भूख-प्यास सताने लगी।वीरावती के भाइयों से अपनी बहन की यह हालत देखी नहीं गई। उन्होंने उसे भोजन कराने के लिए एक उपाय सोचा। भाइयों ने दूर एक पेड़ पर दीपक जलाकर छलनी की आड़ में ऐसा दृश्य बनाया, मानो चंद्रमा निकल आया हो। इसके बाद उन्होंने अपनी बहन से कहा कि चंद्रमा दिखाई दे गया है और वह अर्घ्य देकर भोजन कर सकती है।वीरावती ने भाइयों की बात पर विश्वास कर लिया। उसने उस नकली चंद्रमा को देखकर व्रत खोल लिया। धार्मिक कथा के अनुसार, जैसे ही उसने भोजन करना शुरू किया, उसे अपने पति की मृत्यु का समाचार मिला। यह सुनकर वह दुखी हो गई और अपने पति के शव के पास बैठकर विलाप करने लगी।

तभी वहां से गुजर रही एक देवी ने उसे बताया कि उसने चंद्रमा निकलने से पहले ही व्रत तोड़ दिया था, जिसके कारण उसे यह दुख सहना पड़ा। देवी ने वीरावती को अगले करवा चौथ पर पूरे विधि-विधान से व्रत रखने और पूजा करने की सलाह दी।वीरावती ने देवी के बताए अनुसार श्रद्धापूर्वक करवा चौथ का व्रत रखा और पूजा-अर्चना की। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर देवी ने उसके पति को दोबारा जीवन प्रदान किया। इस तरह वीरावती का वैवाहिक जीवन फिर से सुखमय हो गया। मान्यता है कि तभी से करवा चौथ पर व्रत रखने और कथा सुनने की परंपरा चली आ रही है।

करवा चौथ पूजा विधि

करवा चौथ के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान किया जाता है। इसके बाद परंपरा के अनुसार सरगी ग्रहण करके व्रत का संकल्प लिया जाता है। दिनभर निर्जला व्रत रखने वाली महिलाएं शाम को पूजा की तैयारी करती हैं। पूजा स्थल पर भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान शिव की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करके विधि-विधान से पूजा की जाती है।इस दौरान करवा माता की पूजा की जाती है और करवा चौथ की कथा सुनी या पढ़ी जाती है। पूजा में करवा, दीपक, रोली, अक्षत, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री का उपयोग किया जाता है। रात में चंद्रमा निकलने पर छलनी से चंद्र दर्शन किए जाते हैं और चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत खोला जाता है।

करवा चौथ व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ का व्रत पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है। महिलाएं इस दिन अपने पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। कई स्थानों पर अविवाहित युवतियां भी मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से यह व्रत रखती हैं।करवा चौथ के दिन व्रत कथा सुनना, श्रद्धापूर्वक पूजा करना और चंद्रमा को अर्घ्य देना इस पर्व के प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान माने जाते हैं। हालांकि, व्रत रखने वाली महिलाओं को अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।