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Kushotpatini or Pithori Amavasya 2026: कब है पिठौरी अमावस्या और हरतालिका तीज? जानें पूरी तिथि और पंचांग

 

हिंदू पंचांग के अनुसार इस सप्ताह कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार आने वाले हैं। इनमें कुशोत्पाटिनी अमावस्या (पिठौरी अमावस्या) और हरतालिका तीज व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों पूजा-पाठ, दान और व्रत करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।

कुशोत्पाटिनी या पिठौरी अमावस्या कब है?

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अमावस्या को कुशोत्पाटिनी अमावस्या और पिठौरी अमावस्या कहा जाता है। वर्ष 2026 में अमावस्या तिथि 10 सितंबर को सुबह 10:33 बजे शुरू होगी और 11 सितंबर को सुबह 8:56 बजे तक रहेगी।

  • 10 सितंबर 2026 (गुरुवार): कुशा ग्रहण और पिठौरी व्रत की मान्यता के अनुसार महत्वपूर्ण दिन माना जा रहा है।
  • 11 सितंबर 2026 (शुक्रवार): अमावस्या स्नान, दान और पितरों के तर्पण के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पिठौरी अमावस्या का महत्व

मान्यता है कि पिठौरी अमावस्या के दिन माताएं अपनी संतान की सुख-समृद्धि और लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन देवी पिठोरी, 64 योगिनियों और मातृ शक्तियों की पूजा करने की परंपरा बताई गई है।

वहीं, कुशोत्पाटिनी अमावस्या के दिन धार्मिक कार्यों के लिए कुशा घास ग्रहण करने की परंपरा भी मानी जाती है।

हरतालिका तीज व्रत कब है?

हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर 2026 (सोमवार) को रखा जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर पति की लंबी आयु और वैवाहिक सुख की कामना करती हैं।

हरतालिका तीज का धार्मिक महत्व

पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी वजह से हरतालिका तीज को अखंड सौभाग्य और मनचाहे वर की प्राप्ति से जोड़कर देखा जाता है।

इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और शिव-पार्वती की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर पूजा करती हैं। पूजा में सुहाग की सामग्री, फल, फूल और विशेष भोग अर्पित करने की परंपरा है।