करणी माता मंदिर का बदलेगा स्वरूप, श्रद्धालुओं को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं, जुलाई से दिखेगा नया दरबार
राजस्थान के बीकानेर जिले से लगभग 30 से 33 किलोमीटर दूर देशनोक कस्बे में स्थित करणी माता मंदिर देश-विदेश में अपनी अनूठी पहचान रखता है। यह मंदिर मां करणी को समर्पित है, जिन्हें स्थानीय परंपराओं में मां दुर्गा का अवतार माना जाता है। यह धार्मिक स्थल "चूहों वाले मंदिर" के नाम से भी प्रसिद्ध है, क्योंकि यहां हजारों काले चूहे, जिन्हें स्थानीय भाषा में 'काबा' कहा जाता है, मंदिर परिसर में स्वतंत्र रूप से विचरण करते हैं और श्रद्धालु इन्हें अत्यंत पवित्र मानते हैं।
करणी माता कौन थीं?
लोक परंपराओं के अनुसार करणी माता का जन्म 14वीं शताब्दी में चारण समुदाय में हुआ था। उन्होंने अपना जीवन समाज सेवा, आध्यात्मिक साधना और लोककल्याण के लिए समर्पित किया। बीकानेर रियासत के संस्थापक राव बीका सहित कई राजपूत शासकों ने उन्हें अपनी कुलदेवी के रूप में स्वीकार किया। आज भी बीकानेर राजघराने की कुलदेवी के रूप में उनकी विशेष पूजा होती है।
मंदिर में क्यों रहते हैं हजारों चूहे?
धार्मिक मान्यता के अनुसार करणी माता के सौतेले पुत्र लक्ष्मण की मृत्यु के बाद उन्होंने यमराज से उसे पुनर्जीवित करने का आग्रह किया। इसके बाद लक्ष्मण सहित उनके वंशजों को चूहों के रूप में पुनर्जन्म मिलने का वरदान मिला। इसी कारण मंदिर में रहने वाले चूहों को पवित्र माना जाता है और उन्हें नुकसान पहुंचाना अशुभ समझा जाता है। यदि किसी श्रद्धालु से गलती से किसी चूहे की मृत्यु हो जाए, तो परंपरा के अनुसार उसके स्थान पर चांदी या सोने का चूहा अर्पित किया जाता है।
सफेद चूहे के दर्शन का महत्व
मंदिर में हजारों काले चूहों के बीच यदि किसी श्रद्धालु को सफेद चूहा दिखाई दे जाए, तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि सफेद चूहे के दर्शन से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है। हालांकि यह धार्मिक आस्था पर आधारित मान्यता है।
मंदिर की वास्तुकला
वर्तमान भव्य मंदिर का निर्माण बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह के संरक्षण में कराया गया। संगमरमर से निर्मित इस मंदिर के मुख्य द्वार पर उत्कृष्ट नक्काशी, चांदी के विशाल दरवाजे और आकर्षक शिल्पकला श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करती है। मंदिर परिसर में करणी माता पैनोरमा भी विकसित किया गया है, जहां उनके जीवन और लोककथाओं को प्रदर्शित किया गया है।
कब लगता है मेला?
करणी माता मंदिर में वर्ष में दो बार—चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि—के दौरान विशाल मेले का आयोजन होता है। इन अवसरों पर राजस्थान सहित देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए देशनोक पहुंचते हैं।
करणी माता मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का भी महत्वपूर्ण प्रतीक है। अपनी अनोखी परंपराओं, हजारों पवित्र चूहों और समृद्ध इतिहास के कारण यह मंदिर दुनिया के सबसे विशिष्ट धार्मिक स्थलों में गिना जाता है।