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Kanya Pujan 2026: कन्या पूजन में ना करें ये गलतियां, अष्टमी-नवमी में रखें ध्यान
 

 

शारदीय नवरात्रि में अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। इस दौरान छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है और उन्हें हलवा, पूरी, काले चने का भोग खिलाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि कन्या पूजन के समय श्रद्धा, स्वच्छता और कन्याओं के सम्मान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। छोटी-सी लापरवाही से बचने के लिए कुछ जरूरी बातों को जानना महत्वपूर्ण है।

1. कन्याओं की उम्र और संख्या का रखें ध्यान

परंपरा के अनुसार, कन्या पूजन के लिए 2 से 10 वर्ष तक की बच्चियों को आमंत्रित किया जाता है। कई परिवारों में नौ कन्याओं के साथ एक छोटे बालक को भी भोजन कराने की परंपरा है, जिसे बटुक भैरव या लांगुर कहा जाता है। हालांकि, कन्याओं की संख्या कम होने पर भी श्रद्धापूर्वक पूजन किया जा सकता है।

2. बिना सम्मान के भोजन न कराएं

कन्याओं को घर बुलाने के बाद आदरपूर्वक बैठाएं। कई परंपराओं में उनके हाथ-पैर धोने और तिलक लगाने की विधि अपनाई जाती है। बच्चों के साथ प्रेम और सम्मान से व्यवहार करना इस पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

3. भोग बनाते समय रखें सावधानी

कन्या पूजन के लिए हलवा, पूरी और काले चने बनाने की परंपरा प्रचलित है। भोजन ताजा और स्वच्छ रखें। पारंपरिक सात्विक भोजन में प्याज और लहसुन का इस्तेमाल नहीं किया जाता। बच्चों को उनकी इच्छा और भूख के अनुसार ही भोजन दें, जबरदस्ती न करें।

4. कन्याओं को खाली हाथ न विदा करें

भोजन कराने के बाद कन्याओं को अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार फल, दक्षिणा या उपहार दिया जा सकता है। उपहार देते समय बच्चों की उम्र और जरूरत का ध्यान रखें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्हें खुशी और सम्मान के साथ विदा करें।

5. पूजा के दौरान गुस्सा और विवाद से बचें

धार्मिक मान्यताओं में कन्या पूजन के समय घर का वातावरण शांत और सकारात्मक रखने पर जोर दिया जाता है। बच्चों से कोई गलती हो जाए तो उन्हें डांटने या अपमानित करने के बजाय प्यार से समझाएं। पूजा का उद्देश्य श्रद्धा और सद्भाव बनाए रखना भी है।

अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन कब करें?

उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार, 2026 में अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह लगभग 8:29 बजे शुरू होकर 19 अक्टूबर को सुबह लगभग 10:52 बजे तक रहेगी। नवमी तिथि 19 अक्टूबर को इसके बाद शुरू होकर 20 अक्टूबर को दोपहर लगभग 12:50 बजे तक रहेगी। इसलिए अष्टमी और नवमी के अनुसार कन्या पूजन करने वाले भक्त अलग-अलग समय चुन सकते हैं।