☰
×

कलश स्थापना नियम: नवरात्रि में घटस्थापना करते समय इन 6 बातों का जरूर रखें ध्यान
 

 

नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की आराधना और शक्ति की उपासना के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना यानी घटस्थापना के साथ पूजा की शुरुआत होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश को सुख-समृद्धि, शुभता और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए घटस्थापना करते समय पूजा की विधि, स्वच्छता और शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है।

अगर आप भी नवरात्रि में घर पर कलश स्थापना करने जा रहे हैं, तो इन छह महत्वपूर्ण बातों को जरूर जान लें।

1. शुभ मुहूर्त में करें कलश स्थापना

नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना शुभ मुहूर्त में करने की परंपरा है। इसके लिए स्थानीय पंचांग में दिए गए मुहूर्त को देखना चाहिए। शुभ समय का निर्धारण उस वर्ष की तिथि, सूर्योदय और स्थान के अनुसार अलग हो सकता है।

इसलिए कलश स्थापना से पहले अपने शहर के पंचांग के अनुसार सही समय की जानकारी जरूर लें।

2. पूजा स्थल की साफ-सफाई का रखें ध्यान

कलश स्थापना से पहले पूजा करने वाले स्थान को अच्छी तरह साफ करें। इसके बाद वहां चौकी या पूजा का उपयुक्त स्थान तैयार करें। चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जा सकती है।

धार्मिक परंपराओं में पूजा स्थल की स्वच्छता को विशेष महत्व दिया जाता है। इसलिए कलश रखने से पहले जगह को व्यवस्थित कर लें, ताकि नौ दिनों तक पूजा करने में सुविधा रहे।

3. कलश स्थापना के लिए सही सामग्री रखें

घटस्थापना से पहले पूजा की जरूरी सामग्री एकत्र कर लें। सामान्य रूप से कलश, साफ जल, आम या अशोक के पत्ते, नारियल, रोली, अक्षत, फूल और पूजा के लिए अन्य आवश्यक सामग्री रखी जाती है। कई परिवारों में कलश के नीचे मिट्टी और जौ बोने की भी परंपरा होती है।

पूजा सामग्री की सूची परिवार की परंपरा और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए पहले से तैयारी करने से पूजा के दौरान किसी जरूरी वस्तु की कमी नहीं रहती।

4. कलश को साफ और उचित स्थान पर रखें

कलश स्थापना के लिए साफ पात्र का इस्तेमाल करें और उसे पूजा स्थल पर स्थिर जगह पर रखें। पारंपरिक विधि में कलश में जल भरकर उसके मुख पर पत्ते और नारियल रखने की परंपरा प्रचलित है। कुछ परिवार कलश पर मौली बांधते हैं और रोली से तिलक भी लगाते हैं।

कलश ऐसी जगह रखें, जहां वह आसानी से हिले नहीं और पूजा के दौरान सुरक्षित रहे। स्थापना के बाद उसे अनावश्यक रूप से इधर-उधर ले जाने से बचने की सलाह दी जाती है।

5. जौ बोने की परंपरा हो तो उनकी देखभाल करें

नवरात्रि में कई घरों में कलश स्थापना के साथ मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं में जौ को समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है। इन जौ को नियमित रूप से देखना और जरूरत के अनुसार थोड़ा पानी देना उनकी देखभाल का हिस्सा है।

जौ बोने के लिए साफ मिट्टी और उपयुक्त पात्र का इस्तेमाल करें। पानी इतना ही दें कि मिट्टी में नमी बनी रहे, लेकिन पानी जमा न हो।

6. पूजा और दीपक की सुरक्षा का ध्यान रखें

कलश स्थापना के बाद भक्त अपनी परंपरा के अनुसार सुबह-शाम पूजा, मंत्र जाप और आरती करते हैं। यदि घर में अखंड ज्योति जलाने की परंपरा है, तो दीपक को सुरक्षित और स्थिर स्थान पर रखें। उसे पर्दों, कागज और दूसरी ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखना चाहिए।

दीपक या ज्योति को बिना निगरानी के न छोड़ें। पूजा के लिए नियमित समय तय करना भी उपयोगी रहता है, ताकि नवरात्रि के नौ दिनों तक आराधना सहजता से की जा सके।

घटस्थापना के बाद किन बातों का रखें ध्यान?

नवरात्रि के दौरान स्वच्छता बनाए रखना, पूजा स्थल को व्यवस्थित रखना और श्रद्धा के साथ आराधना करना महत्वपूर्ण माना जाता है। व्रत रखने वाले लोग अपनी सेहत और क्षमता के अनुसार उपवास करें। पूजा के नियम परिवार की परंपरा के मुताबिक अपनाए जा सकते हैं।

धार्मिक मान्यताओं में पूजा के दौरान मन की एकाग्रता, श्रद्धा और सद्भाव को विशेष महत्व दिया जाता है। यदि विधि को लेकर कोई संदेह हो, तो स्थानीय पंचांग या जानकार पुरोहित से सलाह ली जा सकती है।