गुरु गोचर 2026: 31 अक्टूबर को सिंह राशि में जाएंगे देवगुरु बृहस्पति, इन राशियों के लिए अहम रहेगा बदलाव
देवगुरु बृहस्पति 31 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 2 मिनट पर कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष में गुरु को ज्ञान, शिक्षा, विवाह, संतान, भाग्य और समृद्धि का कारक माना जाता है। सिंह राशि में पहले से केतु के मौजूद होने के कारण गुरु-केतु की युति भी बनेगी। इसके बाद 13 दिसंबर को गुरु वक्री होंगे और 25 जनवरी 2027 को वापस कर्क राशि में लौट आएंगे।
1. मेष राशि
मेष राशि के जातकों के लिए गुरु का यह गोचर शिक्षा, प्रेम संबंधों और संतान से जुड़े मामलों को महत्वपूर्ण बना सकता है। नौकरीपेशा लोगों को अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर मिल सकते हैं। विद्यार्थियों को पढ़ाई में नियमितता बनाए रखनी चाहिए। भविष्य की योजनाओं पर काम करने के लिए भी यह समय उपयोगी हो सकता है।
2. कर्क राशि
कर्क राशि के जातकों के लिए गुरु का सिंह राशि में प्रवेश आर्थिक मामलों को प्रमुखता दे सकता है। आय बढ़ाने के नए विकल्प तलाशने और करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, खर्चों पर नियंत्रण रखना और बचत को प्राथमिकता देना जरूरी रहेगा।
3. सिंह राशि
राशि
धनु राशि के जातकों के लिए गुरु का गोचर भाग्य, उच्च शिक्षा, लंबी दूरी की यात्रा और करियर से जुड़े मामलों को महत्वपूर्ण बना सकता है। विद्यार्थियों और नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को प्रयास जारी रखने चाहिए। कारोबार में विस्तार की योजना बना रहे लोगों को पूरी जानकारी जुटाकर ही आगे बढ़ना चाहिए।
गुरु के वक्री होने का क्या होगा असर?
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, गुरु 13 दिसंबर 2026 को सिंह राशि में वक्री होंगे और 25 जनवरी 2027 को वक्री अवस्था में वापस कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। इसलिए सिंह राशि में उनका यह चरण सीमित अवधि का रहेगा।