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Jagannath Rath Yatra 2026: कौन हैं भगवान जगन्नाथ की मौसी? 7 दिनों तक क्यों रुकते हैं प्रभु, जानें पूरी धार्मिक कथा

 

हर साल ओडिशा के पुरी में निकलने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा पर्व होती है। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य रथों पर सवार होकर अपने मुख्य मंदिर से निकलते हैं और अपनी मौसी के घर जाते हैं। वहां भगवान करीब 7 दिनों तक विश्राम करते हैं, जिसके बाद वापस अपने धाम लौट आते हैं।

भगवान जगन्नाथ की यह यात्रा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के बीच प्रेम और अपनत्व का प्रतीक मानी जाती है। आइए जानते हैं कि भगवान जगन्नाथ की मौसी कौन हैं और प्रभु हर साल उनके घर क्यों जाते हैं।

कौन हैं भगवान जगन्नाथ की मौसी?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की मौसी गुंडिचा देवी हैं। पुरी में स्थित गुंडिचा मंदिर को भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर माना जाता है।

मान्यता है कि राजा इंद्रद्युम्न की पत्नी रानी गुंडिचा भगवान जगन्नाथ की परम भक्त थीं। उन्हीं की भक्ति और श्रद्धा के कारण भगवान जगन्नाथ हर साल रथ यात्रा के माध्यम से उनके घर जाते हैं।

इसी वजह से गुंडिचा मंदिर को भगवान जगन्नाथ का "मौसी का घर" कहा जाता है।

क्यों जाते हैं भगवान जगन्नाथ मौसी के घर?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान जगन्नाथ साल में एक बार अपने भक्तों से मिलने के लिए मंदिर से बाहर निकलते हैं। रथ यात्रा का उद्देश्य भगवान का अपने भक्तों के बीच आना और उन्हें दर्शन देना माना जाता है।

कहा जाता है कि भगवान जगन्नाथ अपनी मौसी गुंडिचा देवी के यहां कुछ दिनों के लिए विश्राम करने जाते हैं। यह यात्रा भगवान और उनके भक्तों के बीच प्रेम और रिश्ते की भावना को दर्शाती है।

7 दिनों तक गुंडिचा मंदिर में रहते हैं भगवान

रथ यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा गुंडिचा मंदिर पहुंचते हैं। यहां भगवान की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और उन्हें अलग-अलग प्रकार के भोग अर्पित किए जाते हैं।

लगभग 7 दिनों के प्रवास के बाद भगवान अपने मुख्य मंदिर की ओर वापस लौटते हैं। इस वापसी यात्रा को बहुदा यात्रा कहा जाता है।

मौसी के घर जाते समय मिलता है भक्तों को दर्शन का अवसर

जगन्नाथ रथ यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस दौरान भगवान मंदिर के गर्भगृह से बाहर आकर आम लोगों के बीच आते हैं। मान्यता है कि जिन भक्तों को मंदिर में दर्शन नहीं मिल पाते, वे भी रथ यात्रा के दौरान भगवान के दर्शन कर सकते हैं।

इसी कारण रथ यात्रा को भगवान जगन्नाथ की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है।

जगन्नाथ रथ यात्रा का धार्मिक महत्व

जगन्नाथ रथ यात्रा भारतीय संस्कृति और भक्ति परंपरा का अनोखा उदाहरण है। यह संदेश देती है कि भगवान केवल मंदिरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अपने भक्तों के बीच भी आते हैं।

भगवान जगन्नाथ का अपनी मौसी के घर जाना परिवार, प्रेम और अपनत्व की भावना को दर्शाता है। यही कारण है कि हर साल लाखों श्रद्धालु इस दिव्य यात्रा में शामिल होकर प्रभु के दर्शन का लाभ उठाते हैं।