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क्या शारदीय नवरात्रि में अष्टमी-नवमी का मान्य एक ही दिन? जान लें हवन और कन्या पूजन का मुहूर्त
 

 

शारदीय नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। इन दोनों दिनों मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी और नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इस साल अष्टमी और नवमी को लेकर भक्तों के बीच तारीख को लेकर असमंजस बना हुआ है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार दोनों तिथियों का पूजन एक ही दिन किया जाएगा।

अष्टमी और नवमी कब होगी?

पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि 2026 में अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर सुबह 8 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर 19 अक्टूबर सुबह करीब 10 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी। उदया तिथि और पूजा परंपरा के अनुसार 19 अक्टूबर को ही अष्टमी-नवमी दोनों का मान्य माना जा रहा है।

इस दिन मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ कन्या पूजन और हवन किए जाएंगे।

कन्या पूजन का शुभ समय

नवरात्रि की अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर पूजन करने से नवरात्रि व्रत पूर्ण होता है।

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 19 अक्टूबर को अष्टमी-नवमी पूजन के दौरान संधि पूजा का समय सुबह करीब 10 बजकर 29 मिनट से 11 बजकर 17 मिनट तक बताया गया है।

हवन का महत्व

नवरात्रि के अंतिम दिनों में हवन करने की परंपरा है। भक्त मां दुर्गा की पूजा के बाद हवन कर नवरात्रि साधना का समापन करते हैं। हवन में घी, हवन सामग्री, जौ और अन्य पूजन सामग्री से आहुति देने का विधान बताया गया है।

कन्या पूजन में क्या करें?

  • छोटी कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर आमंत्रित करें
  • उनके पैर धोकर तिलक करें
  • भोजन कराएं और श्रद्धानुसार उपहार या दक्षिणा दें
  • मां दुर्गा से सुख-समृद्धि की कामना करें

शारदीय नवरात्रि में अष्टमी और नवमी का दिन भक्तों के लिए बेहद खास माना जाता है। हालांकि पूजा की विधि और समय में क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार अंतर हो सकता है, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना भी उचित रहता है।