गणेश जी की सूंड दाईं ओर हो या बाईं? गणेश चतुर्थी पर मूर्ति खरीदते वक्त देखें ये 4 चीजें
गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश की आराधना और स्थापना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन भक्त अपने घरों और पंडालों में गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापित करते हैं। लेकिन गणेश जी की मूर्ति खरीदते समय कई लोग इस बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि गणपति की सूंड किस दिशा में होनी चाहिए? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश जी की सूंड की दिशा का विशेष महत्व माना जाता है।
आइए जानते हैं गणेश चतुर्थी पर मूर्ति खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
1. गणेश जी की सूंड किस दिशा में होनी चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर में पूजा के लिए बाईं ओर मुड़ी हुई सूंड वाले गणेश जी की मूर्ति को शुभ माना जाता है। ऐसी प्रतिमा को वाममुखी गणेश कहा जाता है। मान्यता है कि इनकी पूजा करना सरल होता है और घर में सुख-शांति व सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
वहीं दाईं ओर मुड़ी हुई सूंड वाले गणेश जी को सिद्धिविनायक स्वरूप माना जाता है। इनकी पूजा में विशेष नियमों और विधि-विधान का पालन करना जरूरी माना जाता है। इसलिए आमतौर पर इन्हें मंदिरों या विशेष पूजा स्थलों में स्थापित किया जाता है।
2. गणेश जी की मुद्रा का रखें ध्यान
गणपति की मूर्ति खरीदते समय उनकी मुद्रा भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
- बैठे हुए गणेश जी की मूर्ति घर के लिए शुभ मानी जाती है। इसे स्थिरता और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
- खड़े हुए गणेश जी की मूर्ति को अधिकतर कार्यस्थल या व्यापारिक स्थानों पर रखने की मान्यता है, क्योंकि इसे ऊर्जा और सक्रियता से जोड़ा जाता है।
3. गणेश जी के हाथों में क्या होना चाहिए?
भगवान गणेश की प्रतिमा में उनके हाथों में मौजूद वस्तुओं का भी महत्व बताया गया है। आमतौर पर गणेश जी के हाथों में:
- मोदक
- पाश
- अंकुश
- आशीर्वाद मुद्रा
देखने को मिलती है। मोदक को ज्ञान और सफलता का प्रतीक माना जाता है।
4. मूर्ति का रंग और आकार भी है खास
गणेश चतुर्थी पर मूर्ति खरीदते समय रंग और आकार का भी ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सफेद या लाल रंग के गणपति शुभ माने जाते हैं। घर के लिए बहुत बड़ी प्रतिमा की बजाय ऐसी मूर्ति चुनने की सलाह दी जाती है जिसकी नियमित पूजा आसानी से की जा सके।
गणेश स्थापना के लिए जरूरी बातें
- गणेश जी की मूर्ति को साफ और पवित्र स्थान पर स्थापित करें।
- प्रतिमा का मुख घर के अंदर की ओर होना शुभ माना जाता है।
- गणपति स्थापना के बाद नियमित रूप से पूजा और आरती करें।
- पूजा स्थल को स्वच्छ रखना चाहिए।