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इंदिरा एकादशी 2026: व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए? इन कामों से भी करें परहेज

 

पितृ पक्ष में आने वाली एकादशी को इंदिरा एकादशी कहा जाता है। हिंदू धर्म में इस एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इंदिरा एकादशी का व्रत करने और भगवान विष्णु की पूजा करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार निर्जल या फलाहार व्रत रखते हैं। साथ ही पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों में समय बिताते हैं।

इंदिरा एकादशी के व्रत को लेकर कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि इस दिन क्या खाना चाहिए और किन चीजों से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन खान-पान के साथ आचरण में भी संयम रखना जरूरी माना गया है।

इंदिरा एकादशी में क्या नहीं खाना चाहिए

एकादशी व्रत में सबसे प्रमुख रूप से चावल का सेवन नहीं किया जाता। धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी के दिन चावल और चावल से बनी चीजों से परहेज करना चाहिए। इसके अलावा गेहूं, चावल, दाल और सामान्य अनाज से बने खाद्य पदार्थ भी व्रत के दौरान नहीं खाने चाहिए।

व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार फल, दूध, दही, मखाने, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा और सेंधा नमक जैसी व्रत में इस्तेमाल होने वाली चीजों का सेवन करते हैं। हालांकि, अलग-अलग परिवारों और संप्रदायों में व्रत के नियम अलग हो सकते हैं।

इन चीजों से भी करें परहेज

इंदिरा एकादशी के दिन तामसिक भोजन से दूर रहने की सलाह दी जाती है। मांसाहार, शराब और अन्य नशीली चीजों का सेवन धार्मिक व्रत की भावना के विपरीत माना जाता है। कई परंपराओं में प्याज और लहसुन से भी इस दिन परहेज किया जाता है।

व्रत के दौरान जरूरत से ज्यादा भोजन करने के बजाय सात्विक और हल्का भोजन करने की परंपरा है। जो लोग निर्जल या कठिन व्रत नहीं रख सकते, वे अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार फलाहार कर सकते हैं।

इंदिरा एकादशी पर क्या नहीं करना चाहिए

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन व्यक्ति को क्रोध, झूठ, विवाद और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। इस दिन मन को शांत रखते हुए भगवान विष्णु का ध्यान, मंत्र जाप और धार्मिक पाठ करने की परंपरा है।

किसी व्यक्ति के प्रति गलत भावना रखना या जानबूझकर किसी को परेशान करना भी व्रत की भावना के विपरीत माना जाता है। इसलिए इस दिन संयमित व्यवहार करने की सलाह दी जाती है।

पितरों के लिए क्यों खास है इंदिरा एकादशी

इंदिरा एकादशी पितृ पक्ष के दौरान आती है, इसलिए इसे पितरों की शांति और सद्गति से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। कई लोग इस दिन पितरों का स्मरण करते हैं और जरूरतमंदों को दान-पुण्य भी करते हैं।

ध्यान रखें कि ये नियम धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में एकादशी व्रत के नियमों में अंतर हो सकता है। स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर कठोर व्रत रखने के बजाय अपनी स्थिति के अनुसार आहार लेना उचित है।