इंदिरा एकादशी 2026: 6 अक्टूबर को रखा जाएगा व्रत, जानें पितरों की सद्गति से जुड़ी कथा
पितृ पक्ष में पड़ने वाली इंदिरा एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ पितरों का स्मरण और उनके लिए प्रार्थना करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इंदिरा एकादशी का व्रत पितरों की सद्गति और शांति के लिए किया जाता है। कहा जाता है कि इस व्रत के पुण्य प्रभाव से पितरों को मोक्ष या बैकुंठ धाम की प्राप्ति का मार्ग मिलता है।
इस बार इंदिरा एकादशी का व्रत 6 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा। पितृ पक्ष के दौरान आने के कारण इस एकादशी को विशेष फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं।
क्या है इंदिरा एकादशी की कथा?
पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन समय में महिष्मती नगरी में इंद्रसेन नाम के एक राजा रहते थे। राजा अपनी प्रजा का पालन-पोषण बहुत अच्छे से करते थे और भगवान विष्णु के परम भक्त थे। एक दिन नारद मुनि उनके दरबार में पहुंचे।
नारद मुनि ने राजा को बताया कि उनके पिता की मृत्यु के बाद उन्हें यमलोक में कष्ट भोगना पड़ रहा है। राजा यह सुनकर बहुत दुखी हुए और उन्होंने अपने पिता की सद्गति के लिए उपाय पूछा।
तब नारद मुनि ने राजा को पितृ पक्ष में आने वाली इंदिरा एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इस व्रत को विधि-विधान से करने और इसका पुण्य अपने पितरों को समर्पित करने से उन्हें सद्गति प्राप्त हो सकती है।
राजा इंद्रसेन ने रखा व्रत
नारद मुनि की बात मानकर राजा इंद्रसेन ने इंदिरा एकादशी का व्रत किया। उन्होंने भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की और पूरे श्रद्धाभाव से एकादशी का पालन किया। इसके बाद उन्होंने व्रत का पुण्य अपने पिता को समर्पित किया।
धार्मिक मान्यता के अनुसार राजा के इस व्रत और पुण्य के प्रभाव से उनके पिता को यमलोक के कष्टों से मुक्ति मिली और उन्हें उच्च लोक की प्राप्ति हुई। तभी से इंदिरा एकादशी को पितरों की सद्गति से जोड़कर देखा जाने लगा।
पितृ पक्ष में क्यों खास है इंदिरा एकादशी?
इंदिरा एकादशी पितृ पक्ष में आती है, इसलिए इस दिन पूर्वजों का स्मरण करने का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत, पूजा, तर्पण और दान-पुण्य करने से पितरों की शांति के लिए पुण्य फल की कामना की जाती है।
व्रत रखने वाले श्रद्धालु भगवान विष्णु का ध्यान करते हैं और उनसे अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। कई लोग इस दिन जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र आदि का दान भी करते हैं।
कैसे करें इंदिरा एकादशी की पूजा?
सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करें। उन्हें पीले फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करें। दिनभर भगवान विष्णु का स्मरण और मंत्र जाप किया जा सकता है। शाम को आरती के बाद पितरों का स्मरण कर उनकी शांति के लिए प्रार्थना करें।
ध्यान रखें कि पितरों की सद्गति और बैकुंठ प्राप्ति से जुड़ी बातें धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित हैं। इन्हें आस्था के रूप में देखा जाता है।