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बार-बार करियर बदलते हैं तो कुंडली में हो सकते हैं ये ग्रह, जानें ज्योतिष क्या कहता है

 

हर व्यक्ति के करियर को लेकर सोच अलग होती है। कुछ लोग शुरुआत में जिस क्षेत्र को चुनते हैं, उसी में लगातार मेहनत करते हुए धीरे-धीरे सफलता हासिल करते हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो बेहतर अवसर, ज्यादा कमाई या कुछ अलग करने की चाह में बार-बार अपना करियर बदलते रहते हैं। कई बार करियर में बदलाव व्यक्ति की पसंद, परिस्थितियों या नए अवसरों की वजह से होता है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र में इसके पीछे ग्रहों की स्थिति को भी महत्वपूर्ण माना गया है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार कुंडली में मौजूद कुछ ग्रह व्यक्ति के स्वभाव, निर्णय लेने की क्षमता और पेशेवर जीवन को प्रभावित कर सकते हैं। यदि करियर से जुड़े भाव और उनके स्वामी ग्रह कमजोर हों या उन पर कुछ ग्रहों का प्रभाव हो, तो व्यक्ति के मन में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे जातक एक नौकरी या व्यवसाय में लंबे समय तक टिकने के बजाय बार-बार बदलाव के बारे में सोच सकते हैं।

राहु देता है नए प्रयोग की इच्छा

ज्योतिष में राहु को भ्रम, महत्वाकांक्षा और अचानक बदलाव से जोड़कर देखा जाता है। यदि कुंडली में राहु का संबंध दशम भाव, दशमेश या करियर से जुड़े अन्य ग्रहों से हो तो व्यक्ति पारंपरिक रास्ते से हटकर कुछ नया करने की कोशिश कर सकता है। कई बार यही प्रवृत्ति उसे बार-बार पेशा बदलने के लिए प्रेरित कर सकती है।

बुध से जुड़ा हो सकता है करियर में बदलाव

बुध को बुद्धि, संचार, व्यापार और तर्क का कारक माना जाता है। मजबूत बुध व्यक्ति को कई क्षेत्रों में रुचि दे सकता है। ऐसे जातक एक साथ अलग-अलग चीजें सीखना और नए क्षेत्रों में हाथ आजमाना पसंद कर सकते हैं। यदि कुंडली में बुध का संबंध करियर भाव से हो तो व्यक्ति को एक से अधिक पेशों में रुचि हो सकती है।

चंद्रमा और मन की चंचलता

ज्योतिष में चंद्रमा को मन और भावनाओं का कारक माना जाता है। कुंडली में चंद्रमा की स्थिति अस्थिर होने या उस पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव होने की स्थिति में मन जल्दी बदलने की प्रवृत्ति मानी जाती है। ऐसे में व्यक्ति एक काम से जल्दी ऊब सकता है और नए विकल्प तलाशने लग सकता है।

दशम भाव का महत्व

कुंडली में दशम भाव को कर्म और करियर का प्रमुख भाव माना जाता है। यदि दशम भाव, दशमेश या उससे जुड़े ग्रहों पर कई ग्रहों का प्रभाव हो तो करियर में उतार-चढ़ाव या बदलाव की स्थिति बन सकती है। हालांकि केवल एक ग्रह देखकर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जाता। पूरी कुंडली, दशा और गोचर का विश्लेषण करना जरूरी होता है।

इस तरह बार-बार करियर बदलने के पीछे केवल ग्रहों को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। व्यक्ति की रुचि, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक परिस्थितियां, नौकरी का माहौल और नए अवसर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ज्योतिषीय मान्यताएं इस विषय को एक अलग दृष्टिकोण से देखने का माध्यम देती हैं।