तोरण में आम के कितने पत्ते होने चाहिए? दीवाली पर ना करें ये 5 गलतियां
दिवाली का त्योहार घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली लाने का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग घर की साफ-सफाई करते हैं, रंगोली बनाते हैं और मुख्य दरवाजे को फूलों और आम के पत्तों के तोरण से सजाते हैं। हिंदू धर्म में आम के पत्तों का तोरण लगाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मां लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है।
लेकिन तोरण बनाते और लगाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। अक्सर लोग अनजाने में ऐसी गलतियां कर देते हैं, जिन्हें धार्मिक परंपराओं के अनुसार शुभ नहीं माना जाता। आइए जानते हैं कि दिवाली पर आम के पत्तों का तोरण कैसे बनाना चाहिए और किन पांच गलतियों से बचना चाहिए।
तोरण में आम के कितने पत्ते होने चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली पर मुख्य दरवाजे पर आम के पत्तों का तोरण लगाना शुभ माना जाता है। तोरण में पत्तों की कोई एक निश्चित संख्या सभी परंपराओं में अनिवार्य नहीं है। हालांकि, कई जगहों पर 5, 7, 9 या 11 पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है। विषम संख्या में पत्ते लगाने की परंपरा प्रचलित है।
तोरण के लिए हरे और ताजे आम के पत्ते लेने चाहिए। पत्ते साफ होने चाहिए और मुरझाए या सूखे पत्तों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इन्हें धागे में पिरोकर मुख्य दरवाजे पर इस तरह लगाएं कि तोरण दरवाजे के ऊपरी हिस्से को ढक सके। कुछ परंपराओं में आम के पत्तों के साथ गेंदे के फूल भी लगाए जाते हैं।
दिवाली पर तोरण लगाते समय न करें ये 5 गलतियां
1. सूखे और मुरझाए पत्तों का इस्तेमाल न करें
तोरण बनाने के लिए हमेशा ताजे और हरे पत्ते इस्तेमाल करने की परंपरा है। सूखे, टूटे या मुरझाए पत्ते लगाने से बचना चाहिए। तोरण में लगे पत्ते खराब हो जाएं तो उन्हें बदल देना चाहिए।
2. गंदे दरवाजे पर न लगाएं तोरण
दिवाली पर घर के मुख्य दरवाजे की सफाई का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए तोरण लगाने से पहले दरवाजे और उसके आसपास की जगह को अच्छी तरह साफ कर लें। गंदगी के बीच सजावट करने से बचें।
3. टूटे या फटे पत्ते न लगाएं
तोरण में ऐसे पत्ते इस्तेमाल करें जो साबुत और अच्छी स्थिति में हों। फटे, कीड़े लगे या टूटे हुए पत्तों को लगाने से बचना चाहिए। धार्मिक परंपराओं में पूजा और सजावट के लिए साफ-सुथरी सामग्री को प्राथमिकता दी जाती है।
4. तोरण को उल्टा या टेढ़ा न लगाएं
तोरण को मुख्य दरवाजे के ऊपर व्यवस्थित तरीके से लगाना चाहिए। इसे इस तरह बांधें कि पत्ते सही दिशा में लटकें और सजावट संतुलित दिखाई दे। तोरण लगाने के लिए मजबूत धागे या डोरी का इस्तेमाल करें।
5. कई दिनों तक खराब तोरण न रहने दें
दिवाली के बाद तोरण के पत्ते सूखने या खराब होने लगें तो उन्हें दरवाजे पर लटकाकर न रखें। समय-समय पर तोरण बदलें और पुराने पत्तों को सम्मानपूर्वक हटाकर साफ जगह पर रखें। उन्हें सड़क या नाली में फेंकने से बचें।
तोरण लगाने का क्या है धार्मिक महत्व?
हिंदू धर्म में आम के पत्तों को शुभता, समृद्धि और मंगल का प्रतीक माना जाता है। पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजनों में भी आम के पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है। दिवाली पर मुख्य दरवाजे पर तोरण लगाने की परंपरा मां लक्ष्मी के स्वागत से जुड़ी हुई है।
मान्यता है कि सुंदर और साफ-सुथरा घर मां लक्ष्मी को प्रिय होता है। इसलिए दिवाली पर घर के प्रवेश द्वार को फूलों, रंगोली, दीपक और आम के पत्तों से सजाया जाता है। हालांकि, तोरण में पत्तों की संख्या और उसे लगाने के तरीके को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग-अलग परंपराएं हो सकती हैं।