Garud Puran दुष्टों की मौत कैसे होती है? जानिए क्या कहता है गरुण पुराण
ज्योतिष न्यूज़ डेस्क: सनातन धर्म में कई ऐसे ग्रंथ है जिनमें मानव जीवन और मृत्यु से जुड़ी अहम बातें बताई गई हैं। इसी में से एक गरुड़ पुराण भी है जिसमें मनुष्य के मृत्यु से लेकर सारी जानकारी मिलती है। तो आज हम आपको अपने इस लेख द्वारा गरुड़ पुराण की मदद से बता रहे हैं कि पापी और दुष्ट लोगों की मृत्यु कैसे होती है गरुड़ पुराण में इससे जुड़ी क्या बातें बताई गई हैं तो आइए जानते हैं।
दुष्टों की ऐसे होती है मृत्यु—
गरुड़ पुराण के अनुसार जो व्यक्ति जीवनभर स्वार्थ सिद्धि की हो। जनकल्याण के कार्यों से दूर रहा हो। कामवासना को ही अपना प्रमुख ध्येय बनाया हो। इस तरह के लोग अने अंतिम समय में यमदूतों को सामने देखकर भय से सिहर उठते हैं और घबराहट की वजह से उनके प्राण नीचे की ओर सरक जाते हैं
यही कारण है कि उनके प्राण शारी के निचले उत्सर्जन अंगों यानी की मूत्र द्वार या मल द्वार से बाहर निकलते हैं। ऐसे लोगों का मौत के डर से मल मूत्र भी निकल जाता है। गरुड़ पुराण के अनुसार यमदूत ऐसे दुष्ट लोगों के गले में पाश बांधकर उन्हें यमलोक लेकर जाते हैं।
सदाचारियों की ऐसे होती है मृत्यु—
गरुड़ पुराण के अनुसार ऐसे लोग जो सदकर्म में लीन रहते हैं विधि विधान के साथ ईश्वर की भक्ति और पुण्य के कार्य करते हैं उनकी मृत्यु भी उतनी ही सुखद होती है। ऐसे लोगों के प्राण नाक के द्वारा बाहर निकल जाते हैं इस तरह की मृत्यु होना बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसे लोगों की मृत्यु के तुरंत बाद ही उनकी आत्मा बैकुंठ लोक में चली जाती है।