Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज कब है? जानिए व्रत की तारीख, पूजा विधि और 36 घंटे निर्जला व्रत का महत्व
हिंदू धर्म में हरतालिका तीज व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए हरतालिका तीज का व्रत करती हैं।
मान्यता के अनुसार, इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है और भगवान शिव-पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
हरतालिका तीज 2026 कब मनाई जाएगी?
पंचांग के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। वर्ष 2026 में भी यह पर्व इसी तिथि पर मनाया जाएगा।
हरतालिका तीज के दिन महिलाएं सुबह से ही व्रत का संकल्प लेती हैं और रात में भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा करती हैं। पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है।
36 घंटे निर्जला व्रत की परंपरा
हरतालिका तीज का व्रत कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। कई महिलाएं इस दिन लगभग 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखती हैं। इस दौरान न तो भोजन किया जाता है और न ही जल ग्रहण किया जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उसी तपस्या की स्मृति में महिलाएं श्रद्धा और भक्ति के साथ यह व्रत करती हैं।
हरतालिका तीज की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करना चाहती थीं। उन्होंने वर्षों तक कठोर तपस्या की, लेकिन उनके पिता हिमालय उनका विवाह भगवान विष्णु से करना चाहते थे।
इसके बाद माता पार्वती की सखी उन्हें जंगल में ले गईं, जहां उन्होंने मिट्टी से शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की आराधना की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।
इसी वजह से हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने की परंपरा है।
हरतालिका तीज पूजा विधि
हरतालिका तीज के दिन सुबह स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की जाती है।
पूजा में भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, फूल और जल अर्पित किया जाता है। वहीं माता पार्वती को सुहाग की सामग्री जैसे सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी और वस्त्र चढ़ाने की परंपरा है।
इसके बाद हरतालिका तीज की कथा सुनी जाती है और भगवान शिव-पार्वती की आरती की जाती है।
हरतालिका तीज पर इन बातों का रखें ध्यान
- व्रत के दौरान मन को शांत और सकारात्मक रखना चाहिए।
- पूजा में साफ-सफाई और पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
- भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है।
- व्रत खोलने से पहले पूजा और आरती करना आवश्यक माना जाता है।
हरतालिका तीज का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत करने से पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम और विश्वास बढ़ता है। भगवान शिव और माता पार्वती को आदर्श दांपत्य जीवन का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दिन उनकी पूजा करने से सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की जाती है।