गुरु पुष्य योग 2026: अधिकमास में भी बना खास संयोग, जानें क्या करें और क्या नहीं
ज्येष्ठ अधिकमास के दौरान आज पांचवें दिन एक बेहद शुभ माने जाने वाला संयोग बन रहा है—गुरु पुष्य योग। ज्योतिष शास्त्र में इस योग को अत्यंत मंगलकारी और दुर्लभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने, नई शुरुआत करने और खरीदारी करने से विशेष फल मिलता है। लेकिन इस समय अधिकमास चल रहा है, जिसे परंपरागत रूप से शुभ कार्यों और मांगलिक आयोजनों के लिए वर्जित माना जाता है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इस स्थिति में गुरु पुष्य योग का लाभ कैसे लिया जाए।
क्या होता है गुरु पुष्य योग?
गुरु पुष्य योग तब बनता है जब गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग होता है। पुष्य नक्षत्र को सभी नक्षत्रों में सबसे शुभ और स्थायी फल देने वाला माना गया है। यह योग धन, समृद्धि, सफलता और स्थिरता के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
अधिकमास का प्रभाव
अधिकमास, जिसे मलमास भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग का अतिरिक्त महीना होता है। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश जैसे बड़े मांगलिक कार्य सामान्यतः नहीं किए जाते। हालांकि धार्मिक साधना, पूजा-पाठ और दान का विशेष महत्व होता है। इसलिए इस समय ऊर्जा को आध्यात्मिक कार्यों में लगाने की सलाह दी जाती है।
ऐसे में गुरु पुष्य योग में क्या करें?
1. मां लक्ष्मी की पूजा करें
इस योग में मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। दीपक जलाकर घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाई जा सकती है।
2. धन-संबंधी संकल्प लें
नए व्यापार या बड़े निवेश की शुरुआत तो टालनी चाहिए, लेकिन भविष्य की योजनाओं के लिए संकल्प लेना और मानसिक तैयारी करना शुभ माना जाता है।
3. सोना-चांदी की शुद्ध खरीदारी करें (सीमित रूप में)
कुछ ज्योतिषियों के अनुसार अधिकमास में बड़े लेन-देन से बचना चाहिए, लेकिन प्रतीकात्मक रूप में चांदी का सिक्का या धार्मिक वस्तु खरीदी जा सकती है।
4. दान-पुण्य करें
इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। गुरु पुष्य योग में किया गया दान कई गुना फल देता है।
5. मंत्र जाप और ध्यान
इस शुभ योग में लक्ष्मी मंत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
क्या न करें
- बड़े व्यापार या प्रॉपर्टी डील की शुरुआत न करें
- विवाह या अन्य मांगलिक कार्यक्रम न करें
- अत्यधिक खरीदारी या निवेश से बचें
- जल्दबाजी में कोई बड़ा निर्णय न लें