Guru Purnima 2026: क्या है व्यासपीठ और क्यों की जाती है इस दिन महर्षि वेदव्यास की पूजा? जानें महत्व और परंपरा
हिंदू धर्म में गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान प्रकट करने का विशेष दिन माना जाता है। इस दिन लोग अपने गुरु, शिक्षक और मार्गदर्शकों का आशीर्वाद लेते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुरु पूर्णिमा के दिन महर्षि वेदव्यास की पूजा करने की परंपरा है, क्योंकि उन्होंने वेदों का विभाजन किया और कई महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथों की रचना की।
गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन गुरु की पूजा के साथ-साथ व्यासपीठ का भी विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं व्यासपीठ क्या होती है और गुरु पूर्णिमा पर महर्षि वेदव्यास की पूजा क्यों की जाती है।
गुरु पूर्णिमा 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, गुरु पूर्णिमा का पर्व 30 जुलाई 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन श्रद्धालु अपने गुरुजनों का सम्मान करते हैं और भगवान, गुरु तथा महर्षि वेदव्यास की पूजा करते हैं।
क्या होती है व्यासपीठ?
धार्मिक परंपराओं में व्यासपीठ उस पवित्र आसन को कहा जाता है, जहां बैठकर कथा, धार्मिक प्रवचन या ज्ञान का प्रसार किया जाता है। मान्यता है कि इस स्थान पर बैठकर वक्ता महर्षि वेदव्यास की परंपरा को आगे बढ़ाता है।
व्यासपीठ केवल एक आसन नहीं, बल्कि ज्ञान, धर्म और आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक मानी जाती है। किसी भी धार्मिक कथा या प्रवचन की शुरुआत से पहले व्यासपीठ की पूजा करने की परंपरा कई स्थानों पर आज भी प्रचलित है।
गुरु पूर्णिमा पर वेदव्यास जी की पूजा क्यों होती है?
महर्षि वेदव्यास को हिंदू धर्म में महान ऋषि और आदि गुरु के रूप में सम्मान दिया जाता है। मान्यता है कि उन्होंने चारों वेदों का विभाजन किया, जिससे आम लोगों के लिए वेदों का ज्ञान समझना आसान हुआ।
इसके अलावा महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की रचना की और पुराणों का संकलन भी किया। उनके ज्ञान और योगदान के सम्मान में गुरु पूर्णिमा के दिन उनकी पूजा की जाती है।
गुरु पूर्णिमा पूजा विधि
- सुबह स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें।
- गुरु, महर्षि वेदव्यास और भगवान का ध्यान करें।
- गुरु की तस्वीर या व्यासपीठ की पूजा करें।
- फूल, फल और मिठाई अर्पित करें।
- अपने गुरुजनों से आशीर्वाद लें।
गुरु पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व
गुरु को जीवन में सही मार्ग दिखाने वाला माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि गुरु के ज्ञान और आशीर्वाद से व्यक्ति अज्ञानता के अंधकार से निकलकर सफलता और आत्मज्ञान की ओर बढ़ता है। यही कारण है कि गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर माना जाता है।