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सावन का पहला प्रदोष व्रत 10 अगस्त को, भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए करें ये 3 आसान उपाय

 

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस महीने में पड़ने वाले प्रदोष व्रत का भी धार्मिक महत्व बढ़ जाता है। इस साल सावन का पहला प्रदोष व्रत 10 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की कामना की जाती है।

प्रदोष व्रत के दिन भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं, बेलपत्र अर्पित करते हैं और मंत्रों का जाप करते हैं। अगर आप भी इस दिन भोलेनाथ को प्रसन्न करने की कामना रखते हैं तो कुछ आसान उपाय श्रद्धा के साथ कर सकते हैं।

1. शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाएं

प्रदोष व्रत के दिन शाम के समय भगवान शिव का अभिषेक करना शुभ माना जाता है। सबसे पहले शिवलिंग पर स्वच्छ जल या गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र, फूल और फल चढ़ाएं। बेलपत्र अर्पित करते समय 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें। धार्मिक मान्यता है कि बेलपत्र भगवान शिव को प्रिय है और इसे अर्पित करने से भक्त को शुभ फल की प्राप्ति होती है।

2. दीपक जलाकर करें शिव-पार्वती की पूजा

प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। पूजा स्थल पर घी का दीपक जलाएं और धूप-दीप अर्पित करें। इसके बाद शिव-पार्वती की आरती करें। परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। मान्यता के अनुसार प्रदोष काल में की गई शिव पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।

3. 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें

इस दिन भगवान शिव का ध्यान करते हुए 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करना सरल और शुभ उपाय माना जाता है। श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके साथ महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी शिव आराधना में किया जाता है। मंत्र जाप के दौरान मन को शांत और एकाग्र रखने की कोशिश करें।

प्रदोष व्रत में रखें इन बातों का ध्यान

प्रदोष व्रत रखने वाले भक्त अपनी क्षमता के अनुसार उपवास कर सकते हैं। स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर कठोर उपवास से बचना चाहिए। पूजा के दौरान स्वच्छता और सात्विकता का ध्यान रखें। किसी भी धार्मिक उपाय को निश्चित परिणाम देने वाला नहीं माना जा सकता, बल्कि इन्हें आस्था और परंपरा के रूप में देखा जाता है।