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घर में सबकुछ सही फिर भी नहीं मिल रही तरक्की? जानिए नैऋत्य कोण से जुड़े नियम

 

वास्तु शास्त्र में घर की हर दिशा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि घर की सही दिशाओं में ऊर्जा का संतुलन होने से सुख-समृद्धि और तरक्की के रास्ते खुलते हैं। अगर घर में सब कुछ ठीक होने के बावजूद सफलता में रुकावट आ रही है, तो वास्तु के अनुसार नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम दिशा) पर ध्यान देना चाहिए।

नैऋत्य कोण को घर की स्थिरता, मजबूती और नियंत्रण का स्थान माना जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस दिशा में दोष होने से व्यक्ति को निर्णय लेने में परेशानी, आर्थिक रुकावट और काम में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।

नैऋत्य कोण में क्या होना शुभ माना जाता है?

1. भारी सामान रखना शुभ

वास्तु के अनुसार दक्षिण-पश्चिम दिशा में भारी सामान, अलमारी, फर्नीचर या स्टोर रूम होना शुभ माना जाता है। इससे घर में स्थिरता बनी रहने की मान्यता है।

2. मुख्य व्यक्ति का कमरा

घर के मुखिया का बेडरूम नैऋत्य कोण में होना वास्तु के अनुसार अच्छा माना जाता है। मान्यता है कि इससे नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास बढ़ता है।

3. जमीन का ऊंचा होना

वास्तु में दक्षिण-पश्चिम दिशा को अन्य दिशाओं की तुलना में थोड़ा ऊंचा रखना शुभ माना जाता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संतुलन बना रहने की मान्यता है।

नैऋत्य कोण में किन चीजों से बचना चाहिए?

  • इस दिशा में पूजा घर बनाने से बचने की सलाह दी जाती है।
  • खाली स्थान या बड़ा गड्ढा होना वास्तु में अशुभ माना जाता है।
  • पानी का स्रोत जैसे बोरवेल, टंकी या भूमिगत जल टैंक इस दिशा में रखने से बचने की मान्यता है।
  • इस दिशा को गंदा या अव्यवस्थित नहीं रखना चाहिए।

नैऋत्य कोण दोष दूर करने के उपाय

  • दक्षिण-पश्चिम दिशा को साफ और व्यवस्थित रखें।
  • इस दिशा में भारी वस्तुएं रखकर संतुलन बनाया जा सकता है।
  • घर में नियमित रूप से सकारात्मक वातावरण बनाए रखें।
  • वास्तु दोष दूर करने के लिए विशेषज्ञों द्वारा बताए गए उपाय अपनाए जा सकते हैं।