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दशहरा 2026 पूजा मुहूर्त: विजयादशमी पर कब करें शस्त्र पूजा, जानें विधि
 

 

दशहरा यानी विजयादशमी का पर्व 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है। विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर भगवान श्रीराम और मां दुर्गा की विजय का उत्सव मनाया जाता है। दशहरे पर शस्त्र पूजा करने की भी पुरानी परंपरा है। पहले राजा और योद्धा अपने शस्त्रों की पूजा करते थे, जबकि आज कई लोग हथियारों के साथ-साथ अपने कामकाज में इस्तेमाल होने वाले औजारों, मशीनों और उपकरणों की भी पूजा करते हैं।

अगर आप भी इस दशहरे पर शस्त्र पूजा करने की तैयारी कर रहे हैं, तो जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री और पूजा करने की आसान विधि।

दशहरा 2026 शस्त्र पूजा का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर विजय मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से 2 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इस समय शस्त्र पूजा करना शुभ माना जाता है। हालांकि, अलग-अलग शहरों के पंचांग के अनुसार मुहूर्त में अंतर हो सकता है। जयपुर में विजय मुहूर्त लगभग दोपहर 2:06 बजे से 2:51 बजे तक बताया गया है।

  • दशहरा: 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार

  • विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 से 2:45 बजे तक, सामान्य संदर्भ

  • जयपुर का विजय मुहूर्त: दोपहर 2:06 से 2:51 बजे तक

शस्त्र पूजा के लिए जरूरी सामग्री

शस्त्र पूजा के लिए आप अपनी परंपरा के अनुसार सामान्य पूजा सामग्री रख सकते हैं।

  • रोली या कुमकुम

  • हल्दी और अक्षत

  • फूल और माला

  • धूप और दीपक

  • स्वच्छ कपड़ा

  • मिठाई या फल का प्रसाद

  • शुद्ध जल

दशहरे पर शस्त्र पूजा कैसे करें?

1. शस्त्रों और उपकरणों की सफाई करें

सबसे पहले पूजा में शामिल किए जाने वाले शस्त्रों या औजारों को सावधानीपूर्वक साफ करें। यदि घर में कोई पारंपरिक शस्त्र है, तो उसे सुरक्षित स्थान पर रखें। पूजा के दौरान बच्चों को उससे दूर रखें।

2. पूजा स्थल तैयार करें

घर में किसी साफ जगह पर चौकी या स्वच्छ कपड़ा बिछाएं। वहां शस्त्र या औजारों को सुरक्षित तरीके से रखें। पूजा स्थल पर धूप-दीप की व्यवस्था करें, लेकिन ज्वलनशील वस्तुओं से उचित दूरी बनाए रखें।

3. भगवान गणेश और इष्टदेव का स्मरण करें

पूजा की शुरुआत भगवान गणेश और अपने इष्टदेव का स्मरण करके करें। इसके बाद सुख, शांति, साहस और अपने कार्यों में सफलता की कामना करें।

4. तिलक लगाकर फूल अर्पित करें

शस्त्र या औजार पर परंपरा के अनुसार रोली-कुमकुम का तिलक लगाएं और फूल अर्पित करें। ध्यान रखें कि किसी धारदार या कार्यशील हिस्से पर हाथ न लगाएं। बंदूक जैसे हथियार की पूजा करते समय उसे पूरी तरह सुरक्षित स्थिति में रखना जरूरी है।

5. आरती करके प्रसाद बांटें

पूजा के अंत में आरती करें और प्रसाद अर्पित करें। परिवार के सदस्यों में प्रसाद बांटें। पूजा के बाद शस्त्रों और औजारों को सुरक्षित स्थान पर रख दें।

दशहरे पर शमी वृक्ष की पूजा का क्या है महत्व?

विजयादशमी पर शमी वृक्ष की पूजा करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शमी के पत्तों को शुभता, विजय और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। कई जगहों पर लोग शमी वृक्ष की पूजा करते हैं और एक-दूसरे को शमी के पत्ते देकर शुभकामनाएं देते हैं। इसके साथ ही कुछ परंपराओं में माता अपराजिता की पूजा भी की जाती है।

विजयादशमी पर क्यों की जाती है शस्त्र पूजा?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, दशहरा भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय की याद में मनाया जाता है। पुराने समय में शस्त्रों को राज्य की रक्षा और सुरक्षा का महत्वपूर्ण साधन माना जाता था। इसलिए योद्धा विजयादशमी पर अपने शस्त्रों की पूजा करते थे। समय के साथ यह परंपरा कई परिवारों में जारी रही।

आज लोग अपने कामकाज से जुड़े औजारों, मशीनों और अन्य साधनों की पूजा भी करते हैं। मान्यता है कि इस दिन पूजा करके लोग अपने काम में सफलता और सुरक्षा की कामना करते हैं। पूजा के साथ शस्त्रों को सुरक्षित रखना, उनका जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना और सुरक्षा नियमों का पालन करना भी जरूरी है।