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बिस्तर पर बैठकर करते हैं ऑफिस का काम? करियर पर पड़ सकता है असर
 

 

वर्क फ्रॉम होम का चलन बढ़ने के बाद कई लोगों की दिनचर्या बदल गई है। अब लोग ऑफिस जाने के बजाय घर से ही लैपटॉप या कंप्यूटर पर काम करते हैं। ऐसे में कुछ लोग आराम के लिए बिस्तर पर बैठकर ही ऑफिस का काम करने लगते हैं। शुरुआत में यह तरीका सुविधाजनक लगता है, लेकिन लंबे समय तक बिस्तर पर बैठकर काम करना सेहत और काम करने की क्षमता दोनों को प्रभावित कर सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, काम करने के लिए सही जगह और बैठने का तरीका बेहद जरूरी है। गलत पोजिशन में लंबे समय तक बैठने से शरीर में दर्द, थकान और एकाग्रता की कमी जैसी परेशानियां हो सकती हैं। इसका असर धीरे-धीरे काम की गुणवत्ता और प्रोफेशनल प्रदर्शन पर भी दिखाई दे सकता है।

1. पीठ और गर्दन में दर्द की समस्या

बिस्तर पर बैठकर लैपटॉप चलाते समय अक्सर लोग तकियों का सहारा लेकर झुक जाते हैं। इस स्थिति में गर्दन और रीढ़ की हड्डी सही पोजिशन में नहीं रहती। लंबे समय तक ऐसा करने से गर्दन, कंधे और कमर में दर्द की शिकायत हो सकती है। कई बार यह परेशानी रोजमर्रा के कामों को भी प्रभावित करने लगती है।

2. काम पर फोकस करना हो सकता है मुश्किल

बिस्तर का इस्तेमाल आमतौर पर आराम और नींद के लिए किया जाता है। इसलिए वहां बैठकर काम करने पर दिमाग को काम और आराम के बीच अंतर समझने में परेशानी हो सकती है। आसपास आरामदायक माहौल होने के कारण बार-बार लेटने या मोबाइल देखने का मन हो सकता है। इससे काम के दौरान ध्यान भटकने की आशंका बढ़ जाती है।

3. काम की उत्पादकता पर पड़ सकता है असर

बिस्तर पर काम करते समय सही डेस्क और कुर्सी की सुविधा नहीं होती। लैपटॉप को गोद में रखकर या गलत ऊंचाई पर रखकर काम करने से असुविधा होती है। बार-बार बैठने की पोजिशन बदलने और दर्द के कारण काम की गति धीमी हो सकती है। इससे तय समय में काम पूरा करना मुश्किल हो सकता है।

4. नींद की गुणवत्ता हो सकती है प्रभावित

बिस्तर को सोने की जगह माना जाता है। यदि आप दिनभर इसी जगह बैठकर ऑफिस का काम करते हैं, तो दिमाग के लिए काम और आराम का अंतर बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। काम का तनाव और स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने से सोने की दिनचर्या भी प्रभावित हो सकती है।

5. प्रोफेशनल अनुशासन पर भी असर

घर से काम करते समय खुद की दिनचर्या और अनुशासन बनाए रखना जरूरी होता है। यदि काम करने की कोई निश्चित जगह नहीं है, तो काम और निजी समय के बीच संतुलन बिगड़ सकता है। इससे काम टालने की आदत, समय प्रबंधन में परेशानी और जरूरी कामों में देरी हो सकती है। लंबे समय में इसका असर आपके प्रोफेशनल प्रदर्शन पर पड़ सकता है।

वर्क फ्रॉम होम में इन बातों का रखें ध्यान

घर से काम करते समय कोशिश करें कि एक निश्चित जगह पर डेस्क और कुर्सी लगाकर बैठें। कुर्सी ऐसी होनी चाहिए, जिससे कमर को सहारा मिले और पैर जमीन पर टिके रहें। लैपटॉप की स्क्रीन आंखों के लगभग बराबर ऊंचाई पर रखें, ताकि गर्दन को बार-बार नीचे न झुकाना पड़े।

इसके अलावा हर 30 से 60 मिनट में कुछ देर के लिए उठें और शरीर को स्ट्रेच करें। लगातार स्क्रीन देखने से बचें और आंखों को भी बीच-बीच में आराम दें।

बिस्तर पर बैठकर कभी-कभार जरूरी काम करना अलग बात है, लेकिन इसे रोजाना की आदत बनाना ठीक नहीं है। सही वर्किंग पोजिशन अपनाने से न केवल शरीर को आराम मिलता है, बल्कि काम में एकाग्रता और नियमितता बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है।