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नवरात्रि के बाद हवन की राख और कलश की चीजों को फेंकने की ना करें गलती, जानें क्या करें
 

 

नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा की पूजा, कलश स्थापना, जौ बोने, हवन और कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। नवरात्रि समाप्त होने के बाद कई घरों में यह सवाल उठता है कि हवन की राख, कलश का जल, जौ, नारियल, फूल और पूजा में इस्तेमाल की गई दूसरी सामग्री का क्या करना चाहिए। कुछ लोग इन्हें नदी में प्रवाहित करते हैं, तो कुछ मिट्टी में दबा देते हैं। धार्मिक परंपराओं में पूजा सामग्री को श्रद्धापूर्वक विदा करने की सलाह दी जाती है। हालांकि, हर सामग्री के लिए एक ही तरीका अनिवार्य नहीं है।

हवन की राख का क्या करें?

नवरात्रि के हवन के बाद बची राख को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। इसे पूजा का अवशेष मानकर सम्मानपूर्वक संभालने की परंपरा है।

  • राख पूरी तरह ठंडी होने दें: हवन के बाद राख में अंगारे रह सकते हैं। इसलिए उसे छूने या हटाने से पहले पूरी तरह ठंडा होने की पुष्टि करें।

  • मिट्टी में मिला सकते हैं: यदि राख में प्लास्टिक, धातु या अन्य अनुपयुक्त सामग्री नहीं मिली है, तो थोड़ी मात्रा में ठंडी राख को मिट्टी में मिलाया जा सकता है।

  • साफ जगह पर रखें: यदि आपकी पारिवारिक परंपरा में राख को पूजा स्थल पर रखने या किसी विशेष तरीके से विसर्जित करने की रीति है, तो उसका पालन कर सकते हैं।

राख को भोजन, पीने के पानी या बच्चों की पहुंच से दूर रखें। इसे किसी चमत्कारी औषधि की तरह इस्तेमाल न करें।

कलश के जल का क्या करें?

नवरात्रि में कलश स्थापना के दौरान जल, आम के पत्ते, नारियल और अन्य पूजा सामग्री रखी जाती है। पूजा पूरी होने के बाद कलश के जल का इस्तेमाल अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार किया जा सकता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, साफ कलश जल को घर में छिड़कने या पौधों में डालने की परंपरा है। यदि जल में ऐसी सामग्री मिली हो जो पौधों के लिए नुकसानदायक हो सकती है, तो उसे पौधों में न डालें। जल को नाली या जल स्रोत में डालते समय भी स्थानीय स्वच्छता नियमों का ध्यान रखें।

नवरात्रि में बोए गए जौ का क्या करें?

कलश स्थापना के साथ बोए गए जौ को कई परिवार शुभता और समृद्धि का प्रतीक मानते हैं। नवरात्रि पूरी होने पर इन्हें सम्मानपूर्वक विदा करने की परंपरा है।

  • अंकुरित जौ को गमले या बगीचे की मिट्टी में लगा सकते हैं।

  • यदि परिवार में जौ को विसर्जित करने की परंपरा है, तो स्थानीय नियमों का ध्यान रखते हुए ऐसा करें।

  • जौ को प्लास्टिक या दूसरे कचरे के साथ न फेंकें।

जौ का रंग या लंबाई अपने आप में भविष्य का निश्चित संकेत नहीं है। इनका विकास पानी, मिट्टी, धूप और मौसम पर निर्भर करता है।

कलश का नारियल और अन्य सामग्री का क्या करें?

कलश पर रखा नारियल यदि साफ, साबुत और खाने योग्य है, तो उसे अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार प्रसाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। खराब या फफूंद लगा नारियल न खाएं।

पूजा में इस्तेमाल किए गए फूलों और पत्तों को अलग करके मिट्टी में मिलाया जा सकता है। वहीं प्लास्टिक की सजावट, धागे, पन्नी और अन्य गैर-जैविक सामग्री को अलग करके उचित तरीके से निपटाएं।

नवरात्रि की पूजा सामग्री का विसर्जन करते समय न करें ये गलतियां

1. पूजा सामग्री को कूड़े में मिलाकर न फेंकें: फूल, पत्ते और जौ जैसी प्राकृतिक सामग्री को अलग करके मिट्टी में मिलाना बेहतर विकल्प हो सकता है।

2. नदियों और तालाबों को प्रदूषित न करें: पूजा सामग्री के साथ प्लास्टिक, पॉलिथीन, कपड़े या अन्य कचरा जल स्रोतों में न डालें।

3. जलती राख को तुरंत न हटाएं: हवन के बाद राख के अंदर गर्म अंगारे हो सकते हैं। पूरी तरह ठंडा होने तक इंतजार करें।

4. धार्मिक मान्यताओं के कारण डरें नहीं: पूजा सामग्री को संभालने के अलग-अलग पारिवारिक और क्षेत्रीय तरीके हो सकते हैं। किसी एक तरीके का पालन न कर पाने पर अनावश्यक भय में न पड़ें।

क्या नवरात्रि की पूजा सामग्री घर में रख सकते हैं?

यदि आपकी पारिवारिक परंपरा में कुछ सामग्री, जैसे पूजा का नारियल या थोड़े जौ, संभालकर रखने की रीति है, तो उन्हें साफ और सुरक्षित जगह पर रखा जा सकता है। खाने योग्य सामग्री को लंबे समय तक रखकर खराब न होने दें। फूल-पत्तों जैसी प्राकृतिक सामग्री को मिट्टी में मिलाना या कम्पोस्ट बनाना पर्यावरण के लिहाज से अच्छा विकल्प है।