Diwali 2026: क्या दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की पुरानी मूर्ति से कर सकते हैं पूजा? जानिए कब करना चाहिए विसर्जन
दिवाली का त्योहार आते ही घरों में साफ-सफाई और पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है। आमतौर पर लोग दिवाली पर नई लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां खरीदते हैं और विधि-विधान से उनकी पूजा करते हैं। लेकिन कई बार घर में पहले से रखी भगवान की पुरानी मूर्तियों से लोगों का भावनात्मक जुड़ाव हो जाता है। ऐसे में उन्हें विसर्जित करने का मन नहीं करता।
यही वजह है कि लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या दिवाली पर पुरानी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की पूजा की जा सकती है? क्या हर साल नई मूर्ति खरीदना जरूरी है या पुरानी प्रतिमा से भी विधि-विधान के साथ पूजा की जा सकती है? इस विषय पर पंडित राकेश झा के अनुसार, मूर्ति किस धातु या मिट्टी से बनी है और उसकी स्थिति कैसी है, इसके आधार पर उसे दोबारा पूजा में इस्तेमाल करने के नियम अलग-अलग हो सकते हैं।
चांदी की पुरानी लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति से कर सकते हैं पूजा
अगर आपके घर में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की चांदी की मूर्ति पहले से मौजूद है, तो उसे हर दिवाली दोबारा पूजा में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए नई मूर्ति खरीदना जरूरी नहीं है। दिवाली पूजन से पहले चांदी की प्रतिमा को अच्छी तरह साफ करें और गंगाजल से शुद्ध करें। इसके बाद पूजा स्थल पर स्थापित करके विधि-विधान से पूजा करें।
अगर आप चाहें तो चांदी की पुरानी प्रतिमा के साथ दिवाली के अवसर पर मिट्टी की छोटी लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति भी स्थापित कर सकते हैं। चांदी की प्रतिमा को पूजा घर में पूरे साल रखा जा सकता है।
पीतल की मूर्ति के लिए क्या हैं नियम?
चांदी की तरह पीतल से बनी लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा का इस्तेमाल भी हर साल दिवाली पूजा में किया जा सकता है। पंडित राकेश झा के मुताबिक, धातु से बनी मूर्तियों को साफ करके दोबारा पूजा में स्थापित करना उचित माना जाता है।
हालांकि, इसके लिए एक जरूरी बात का ध्यान रखना चाहिए। अगर पीतल की मूर्ति खंडित यानी टूटी हुई नहीं है, तो उसे दोबारा पूजा में इस्तेमाल कर सकते हैं। पूजा से पहले प्रतिमा को अच्छी तरह साफ करें, गंगाजल से शुद्ध करें और नए वस्त्र अर्पित करके पूजा करें। दिवाली पूजा पूरी होने के बाद भी ऐसी मूर्ति को पूजा घर में रखा जा सकता है।
मिट्टी की पुरानी लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति दोबारा इस्तेमाल करें या नहीं?
दिवाली पर ज्यादातर घरों में मिट्टी से बनी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां खरीदी जाती हैं। इनकी पूजा के बाद कई लोग इन्हें संभालकर रख लेते हैं और अगले साल भी इस्तेमाल करना चाहते हैं।
पंडित राकेश झा के अनुसार, अगर मिट्टी की पुरानी मूर्ति की चमक और आभा खत्म हो गई है या वह कांतिहीन दिखाई देने लगी है, तो उसका दोबारा इस्तेमाल करने के बजाय विसर्जन कर देना चाहिए। ऐसी मूर्ति को पूजा में इस्तेमाल करना शुभ नहीं माना जाता।
वहीं, अगर मूर्ति अच्छी स्थिति में है और उसकी चमक बरकरार है, तो उसे रंगवाकर या पॉलिश करवाकर दोबारा पूजा में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, इसके साथ छोटी लक्ष्मी-गणेश की नई मूर्ति भी स्थापित करने की सलाह दी जाती है।
पुरानी लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति का विसर्जन कब करना चाहिए?
दिवाली पूजा में मिट्टी की मूर्ति स्थापित करने के बाद उसे तुरंत विसर्जित करने की जरूरत नहीं होती। पंडित राकेश झा के अनुसार, दिवाली पर लाई गई मिट्टी की लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति को अगले साल की दिवाली पूजा के बाद विसर्जित करना चाहिए।
इस बीच मूर्ति को अपने पूजा घर में सम्मानपूर्वक रखा जा सकता है। अगर आपके घर में धातु की स्थायी प्रतिमा है, तो उसे विसर्जित करने की जरूरत नहीं होती, बशर्ते वह खंडित न हो।
दिवाली पूजा से पहले इन बातों का रखें ध्यान
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चांदी और पीतल की सही स्थिति वाली मूर्तियों को हर साल पूजा में इस्तेमाल कर सकते हैं।
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पूजा से पहले पुरानी धातु की मूर्तियों को अच्छी तरह साफ और शुद्ध करें।
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खंडित धातु की मूर्ति को पूजा में इस्तेमाल न करें।
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मिट्टी की मूर्ति की चमक और स्थिति खराब होने पर उसका विसर्जन करें।
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अच्छी स्थिति वाली मिट्टी की मूर्ति को परंपरा के अनुसार रंगवाकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।
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दिवाली पर स्थापित मिट्टी की मूर्ति का विसर्जन अगले साल की दिवाली पूजा के बाद करें।
इस तरह दिवाली पर हर साल नई मूर्ति खरीदना अनिवार्य नहीं है। पुरानी मूर्ति का दोबारा इस्तेमाल करने का निर्णय उसकी बनावट, स्थिति और पूजा की परंपरा को ध्यान में रखकर किया जा सकता है। सबसे जरूरी है कि मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा पूरी श्रद्धा, स्वच्छता और सम्मान के साथ की जाए।