Dharma Tips: पूजा-पाठ में पति के दाईं ओर बैठे या बाईं ओर पत्नी? जानिए क्या कहते हैं धर्म शास्त्र
सनातन धर्म में पूजा-पाठ, व्रत, कथा और हवन का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान हर छोटी-बड़ी परंपरा के पीछे कोई न कोई आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कारण जुड़ा होता है। इन्हीं में एक सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि पूजा या हवन के समय पत्नी को पति के दाईं ओर बैठना चाहिए या बाईं ओर? कई लोग इस नियम को लेकर कंफ्यूज रहते हैं।
धर्म शास्त्रों और ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, पूजा के दौरान पति-पत्नी का साथ बैठना शुभ माना जाता है, क्योंकि विवाह के बाद दोनों को एक-दूसरे का आधा अंग माना गया है। यही कारण है कि अधिकांश धार्मिक कार्य पति-पत्नी मिलकर करते हैं। लेकिन बैठने की दिशा और स्थान का भी विशेष महत्व बताया गया है।
पूजा के समय पत्नी किस ओर बैठती है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सामान्य पूजा, व्रत, कथा या हवन के दौरान पत्नी को पति के बाईं ओर बैठना चाहिए। शास्त्रों में पत्नी को “वामांगी” कहा गया है, जिसका अर्थ होता है पति का बायां अंग। इसी वजह से शुभ कार्यों और धार्मिक अनुष्ठानों में पत्नी का स्थान पति की बाईं ओर माना गया है।
ऐसा माना जाता है कि पति-पत्नी जब इस प्रकार बैठकर पूजा करते हैं तो सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। इससे वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
फिर दाईं ओर कब बैठती है पत्नी?
कुछ विशेष परिस्थितियों और संस्कारों में पत्नी को पति की दाईं ओर बैठाने का भी विधान बताया गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, कन्यादान, विवाह के कुछ विशेष संस्कार या पितृ कर्म जैसे कार्यों में पत्नी पति की दाईं ओर बैठ सकती है।
इसके पीछे अलग-अलग धार्मिक कारण और परंपराएं मानी जाती हैं। हालांकि सामान्य पूजा, सत्यनारायण कथा, गृह प्रवेश, हवन और व्रत पूजा में पत्नी का स्थान बाईं ओर ही शुभ माना गया है।
क्या है इसके पीछे धार्मिक मान्यता?
धर्म शास्त्रों में भगवान शिव और माता पार्वती का उदाहरण दिया जाता है। माता पार्वती को भगवान शिव का वाम भाग माना गया है। इसी आधार पर पत्नी को पति का वाम अंग कहा जाता है। यही कारण है कि धार्मिक कार्यों में पत्नी को पति की बाईं ओर बैठाने की परंपरा चली आ रही है।
पूजा के दौरान रखें इन बातों का ध्यान
- पूजा में पति-पत्नी साफ और सात्विक वस्त्र पहनें।
- पूजा के समय मन शांत और सकारात्मक रखें।
- भगवान की आराधना पूरे श्रद्धा भाव से करें।
- अनुष्ठान के दौरान दिशा और विधि का ध्यान रखना शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यताएं आस्था और परंपराओं पर आधारित होती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में नियमों में थोड़ा अंतर भी देखने को मिल सकता है, लेकिन सामान्य तौर पर पूजा और हवन में पत्नी का स्थान पति की बाईं ओर ही माना जाता है।