Dhanteras 2026: धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदना क्यों माना जाता है शुभ? जानें सदियों पुरानी परंपरा
धनतेरस के साथ ही पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत होती है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाए जाने वाले इस पर्व पर बाजारों में खास रौनक रहती है। इस दिन लोग सोना, चांदी, बर्तन और दूसरी नई वस्तुओं की खरीदारी करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि धनतेरस पर कीमती धातुएं खरीदने की परंपरा कैसे शुरू हुई? इसके पीछे समुद्र मंथन से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं हैं।
समुद्र मंथन से जुड़ी है परंपरा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। मान्यता है कि उनके हाथों में अमृत से भरा कलश और बहुमूल्य धातु थी। इसी प्रसंग के कारण धनतेरस पर धातु से बनी वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाने लगा।
पीतल के बर्तनों का क्या है महत्व?
धनतेरस पर सोने-चांदी के अलावा पीतल के बर्तन खरीदने की भी पुरानी परंपरा है। पौराणिक मान्यताओं में भगवान धन्वंतरि के हाथ में कलश होने का उल्लेख मिलता है। इसी वजह से इस दिन बर्तन खरीदने को शुभ माना जाता है। पहले लोग तांबे, पीतल, कांसे और मिट्टी से बने कलश, थाली और दीये खरीदते थे। आज भी कई परिवार इस परंपरा का पालन करते हैं।
मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा का महत्व
धनतेरस को धन और समृद्धि से भी जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर का भी संबंध है। इस दिन मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और आर्थिक संपन्नता आने की मान्यता है। यही कारण है कि लोग इस अवसर पर घर में नई वस्तुएं लाना शुभ समझते हैं।
बदलते समय के साथ बदली खरीदारी
पहले धनतेरस पर लोग मुख्य रूप से जरूरत के बर्तन, धातु के पात्र और दीपक खरीदते थे। समय के साथ इस परंपरा का दायरा बढ़ गया। अब लोग अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार सोने-चांदी के सिक्के, आभूषण, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और घरेलू उपकरण भी खरीदते हैं। हालांकि, बर्तन खरीदने की परंपरा आज भी कई घरों में कायम है।
सोना-चांदी खरीदने के पीछे आर्थिक सोच
सोना और चांदी लंबे समय से मूल्यवान संपत्ति के रूप में देखे जाते रहे हैं। इन्हें जरूरत के समय आर्थिक सहारा देने वाली संपत्ति भी माना जाता है। इसलिए धनतेरस पर इन धातुओं की खरीदारी को धार्मिक आस्था के साथ-साथ बचत और निवेश से भी जोड़कर देखा जाता है। चमक और टिकाऊपन के कारण ये धातुएं समृद्धि और स्थिरता का प्रतीक भी मानी जाती हैं।
इस तरह धनतेरस पर सोना-चांदी और बर्तन खरीदने की परंपरा धार्मिक मान्यताओं, सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक सोच का मिला-जुला रूप है।