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नवरात्रि में दिन या रात, कब करें पूजा? जानिए अष्टलक्ष्मी योग और महानिशा पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त

 

हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त माता रानी का आशीर्वाद पाने के लिए व्रत रखते हैं, मंत्रों का जाप करते हैं और सुबह-शाम विधि-विधान से पूजा करते हैं।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में सूर्योदय के समय और शाम के प्रदोष काल में पूजा करना शुभ माना जाता है। हालांकि, इनके अलावा दिन और रात की कुछ विशेष अवधियों का भी उल्लेख मिलता है, जिनमें ध्यान, मंत्र जाप और देवी की आराधना की जाती है। पंडित राकेश झा के अनुसार, राहुकाल में मंत्र जाप और रात के निशीथ काल में साधना का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। आइए जानते हैं इन दोनों समयों से जुड़ी मान्यताओं और पूजा की विधि के बारे में।

राहुकाल में मंत्र जाप का क्या है महत्व?

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल को आमतौर पर नए शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। हालांकि, इस अवधि में मंत्र जाप, स्तुति पाठ और ध्यान करने को लेकर अलग धार्मिक मान्यताएं हैं।पंडित राकेश झा के अनुसार, राहुकाल में मां दुर्गा की आराधना और मंत्रों का जाप किया जा सकता है। मान्यता है कि इस दौरान श्रद्धापूर्वक देवी की स्तुति करने से नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति और मानसिक शांति की कामना की जाती है।राहुकाल की अवधि लगभग 90 मिनट मानी जाती है। इसका समय हर दिन और स्थान के अनुसार बदलता है। इसलिए पूजा करने से पहले अपने शहर के पंचांग में राहुकाल का समय देख लेना चाहिए।

रात में पूजा के लिए निशीथ काल क्यों माना जाता है खास?

नवरात्रि में शाम के प्रदोष काल के अलावा मध्यरात्रि के समय को भी देवी की आराधना के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। इस अवधि को निशीथ काल कहा जाता है। धार्मिक परंपराओं में इसे ध्यान, मंत्र जाप और विशेष साधना के लिए उपयुक्त समय बताया गया है।मान्यता है कि निशीथ काल में शांत वातावरण के बीच मां दुर्गा का ध्यान करने से मन एकाग्र होता है और साधक को आध्यात्मिक शांति मिलती है। कुछ परंपराओं में इस समय विशेष तांत्रिक साधनाएं भी की जाती हैं।

निशीथ काल में कैसे करें मां दुर्गा की पूजा?

यदि आप नवरात्रि के दौरान निशीथ काल में माता की आराधना करना चाहते हैं, तो सामान्य पूजा इस प्रकार कर सकते हैं:

  1. पूजा से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।

  2. पूजा स्थल को साफ करके शांत वातावरण में आसन बिछाएं।

  3. अपनी परंपरा के अनुसार पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।

  4. मां दुर्गा के सामने घी या तेल का दीपक जलाएं।

  5. श्रद्धापूर्वक मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करें या दुर्गा सप्तशती के किसी उपयुक्त पाठ का पाठ करें।

  6. अंत में माता से परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना करें।

ध्यान रखें कि निशीथ काल का सटीक समय स्थान और पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है। पूजा के लिए स्थानीय पंचांग की जानकारी लेना बेहतर रहेगा।

नवरात्रि में पूजा करते समय किन बातों का रखें ध्यान?

नवरात्रि के दौरान पूजा में समय के साथ-साथ श्रद्धा, स्वच्छता और नियमितता को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। भक्त अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत, मंत्र जाप, दुर्गा चालीसा या अन्य धार्मिक पाठ कर सकते हैं।राहुकाल और निशीथ काल में पूजा करने से जुड़े नियम अलग-अलग परंपराओं में भिन्न हो सकते हैं। इसलिए अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार पूजा करना उचित है।

धार्मिक मान्यता: नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना का मुख्य उद्देश्य देवी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना, मन को एकाग्र करना और जीवन में सकारात्मकता का संकल्प लेना है। राहुकाल में मंत्र जाप और निशीथ काल में साधना को शुभ मानने की परंपराएं प्रचलित हैं, लेकिन इनके परिणामों को निश्चित रूप से धन या सुख-समृद्धि मिलने की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।